मैसूर में कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर के सम्मान में आयोजित परमोत्सव ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस कार्यक्रम को मंत्री की राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। समारोह में उनके समर्थक, साधु-संत, दलित नेता और कई कांग्रेस विधायक शामिल हुए। 74 वर्षीय मंत्री ने कहा कि यह आयोजन उनके कार्यकर्ताओं और प्रशंसकों की इच्छा पर हुआ, जिनके बिना राजनीति में कुछ भी संभव नहीं है।
यह कार्यक्रम मंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। जी परमेश्वर ने अपने संबोधन में कहा, “हमें आने वाले दिनों में संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि हार मानना न केवल मेरी, बल्कि बाबासाहेब आंबेडकर की भी अपमान होगा।” उन्होंने गरीबों, वंचितों और दलितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की बात कही। समारोह में मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री के नारे भी गूंजे, जिसने इस आयोजन के राजनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया।
सत्ता को लेकर तनाव
कर्नाटक में पहले से ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता को लेकर तनाव की खबरें थीं। जुलाई में सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया था कि मुख्यमंत्री पद पर कोई रिक्ति नहीं है और वह अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। मई 2023 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से ही सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता-साझेदारी की अफवाहें उड़ रही हैं।
कभी हार नहीं माननी
कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने समारोह में कहा, “हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। हमें आपके नेतृत्व में एक मजबूत समाज का निर्माण करना है। यह आयोजन महत्वपूर्ण साबित होगा।” उन्होंने मैसूर से शुरू होने वाली इस पहल को ऐतिहासिक राजनीतिक सम्मेलनों की तरह परिणाम देने वाला बताया। इस आयोजन ने कर्नाटक की राजनीति में जी परमेश्वर की बढ़ती महत्वाकांक्षा और प्रभाव को रेखांकित किया है।





