
कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के नेतृत्व वाली सरकार को एक बड़ा झटका दिया है। सिद्दरमैया सरकार ने 18 अक्टूबर को एक आदेश जारी किया था। जिसमें राज्य सरकार ने निजी संगठनों को सरकारी परिसरों और सार्वजनिक जगहों, सड़कों आदि पर कोई भी कार्यक्रम आयोजित करने से प्रशासन की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया था। हालांकि अब हाईकोर्ट ने सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया है।
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार, गृह विभाग और हुब्बली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि सभी को अभिव्यक्ति का अधिकार और शांतिपूर्ण ढंग से सभा करने का अधिकार दिया गया है और सरकार में उसमें देखल नहीं दे सकती। इस मामले में अभी आगे की सुनवाई होनी है। फिलहाल कोर्ट के इस आदेश से RSS को अंतरिम राहत मिल गई है।
RSS की मानसिकता तालिबान जैसी- सिद्धारमैया
इससे पहले प्रियंक खरगे ने 4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर कहा था कि राज्य में RSS की गतिविधियों पर रोक लगाने की जरूरत है। वहीं सीएम सिद्धारमैया ने भी RSS पर हमला बोलते हुए कहा था कि RSS की मानसिकता तालिबान जैसी है। RSS हिंदू धर्म को उसी तरह लागू करना चाहता है जिस तरह तालिबान इस्लाम के सिद्धांतों को थोपने के लिए आदेश जारी करता है। इसी दौरान उन्होंने बैन लगाने की बात कही थी, जिसके बाद सरकारी परिसरों का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई थी।
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