
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कुर्बा समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को एक नया प्रस्ताव भेजने की घोषणा की है। इस प्रस्ताव के साथ अनुभवजन्य डेटा और समर्थन दस्तावेज भी संलग्न किए जाएंगे। कलबुर्गी में एक समुदायिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर दृढ़ प्रतिबद्ध है। कुर्बा समुदाय कर्नाटक का तीसरा सबसे बड़ा समुदाय है और सिद्धारमैया खुद इसी समुदाय से आते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले भी सरकार ने इस तरह का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, लेकिन उसे अस्वीकार कर दिया गया था। अब नई कोशिश की जा रही है। उन्होंने समुदाय के सदस्यों से अपील की कि आगामी जाति जनगणना में अपनी पहचान कुर्बा के रूप में दर्ज कराएं, जो 22 सितंबर से शुरू हो रही है। यह जनगणना समुदाय की मांगों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
एसटी का दर्जा मांग रहे
कुर्बा समुदाय वर्तमान में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अंतर्गत आता है, लेकिन इसके सदस्य लंबे समय से एसटी का दर्जा मांग रहे हैं। कर्नाटक में एसटी के लिए 7% आरक्षण का कोटा है। राज्य सरकार ने मंगलवार को कुर्बा की एक उपजाति को एसटी सूची में शामिल करने के प्रयासों को पुनर्जीवित किया, जिससे विपक्षी भाजपा की ओर से कड़ी आलोचना हुई। एसटी कल्याण विभाग बिदर, कलबुर्गी और यादगीर जिलों के कुर्बा समुदाय की समानताओं का अध्ययन कर रहा है, जो राज्य के गोंडा समुदाय से मिलते-जुलते हैं। गोंडा समुदाय पहले से ही एसटी का हिस्सा है।
किस बात पर है आपत्ति
इस निर्णय से अन्य ओबीसी समुदायों जैसे गोल्ला, उप्पार, सविता समाज और गंगा मठस्थों में भी एसटी सूची में शामिल होने की मांग तेज हो सकती है। बेल्लारी स्थित एसटी विशेषज्ञ एसजी मलगी ने कहा कि सिद्धारमैया का यह कदम अन्य समुदायों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को भड़का सकता है। एसटी सूची में वर्तमान में 53 उपजातियां शामिल हैं, जिनमें कोडागु और चामराजनगर के काडु कुर्बा, जेनु कुर्बा तथा बिदर के गोंडा कुर्बा भी हैं।
