कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर चला आ रहा सस्पेंस गुरुवार (28 मई) को तब समाप्त हो गया, जब सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम के बाद जहां राज्य में नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नाम पर मुहर लग गई, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेतृत्व में हुए इस बदलाव को लेकर तीखा निशाना साधा है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर राज्य की राजनीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
दरअसल मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे और डीके शिवकुमार की ताजपोशी के बाद कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही खींचतान का अंत हुआ है। लेकिन, इस सत्ता हस्तांतरण को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर हमलावर रुख अपना लिया है। भाजपा प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर सत्ता वितरण को लेकर एक अजीबोगरीब ‘टेंडरिंग व्यवस्था’ चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में किसी प्रोजेक्ट की बोली की तरह ही राज्यों और विभिन्न पदों का बंटवारा किया जाता है।
ऐसे चुना जाता है कांग्रेस में मुख्यमंत्री?
गौरव वल्लभ ने अपने बयान में तंज कसते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस में जिस नेता की ‘हाईएस्ट बिड’ यानी सबसे ऊंची बोली होती है, उसे मुख्यमंत्री बना दिया जाता है, और जो नेता बोली में पीछे रह जाता है, उसे पद से हटा दिया जाता है। उन्होंने सीधे तौर पर सिद्धारमैया का नाम लेते हुए कहा कि उनकी ‘बिड’ कमजोर पड़ गई, जिसके चलते उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। वल्लभ ने आगे कहा कि कांग्रेस ने एक ऐसा मॉडल पेश किया है, जिसमें नेतृत्व का निर्धारण किसी पारदर्शी राजनीतिक प्रक्रिया के बजाय ‘बोली लगाने’ जैसी व्यवस्था से होता प्रतीत होता है। यह पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
दरअसल भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी टिप्पणी की और ‘इंडिया अलायंस’ के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह दावा करती है कि राहुल गांधी ‘इंडिया अलायंस’ के सबसे बड़े नेता हैं, लेकिन पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या वास्तव में यह गठबंधन अस्तित्व में भी है या नहीं। वल्लभ ने तर्क दिया कि देश के अलग-अलग राज्यों में विपक्षी दल एक साथ चुनाव नहीं लड़ते, बल्कि वे अपनी-अपनी लड़ाई अलग-अलग लड़ते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में विपक्षी दलों ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़े हैं। यह स्थिति इस बात पर संदेह पैदा करती है कि क्या वास्तव में कोई प्रभावी गठबंधन मौजूद है। गौरव वल्लभ ने आगे जोड़ा कि यदि कोई गठबंधन धरातल पर मौजूद ही नहीं है, तो उसके नेतृत्व का दावा करना भी सवालों के घेरे में आ जाता है। यह कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और गठबंधन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
जानिए पूरा मामला?
गौरतलब है कि कर्नाटक कांग्रेस में कई दिनों से मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान जारी थी, जो गुरुवार (28 मई) को सिद्धारमैया के इस्तीफे के साथ समाप्त हुई। राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार का नाम तय हो गया है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम से पहले, मुख्यमंत्री आवास पर एक बैठक हुई थी। इस बैठक में जब डीके शिवकुमार पहुंचे, तो उन्होंने सिद्धारमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। इन तस्वीरों ने दोनों नेताओं के बीच सुलह और सामंजस्य का संदेश देने का प्रयास किया, हालांकि भाजपा के आरोपों ने इस पर नई बहस छेड़ दी है।






