क्या आप जानते है ​NSG कमांडो की सैलरी कितनी होती है? कैसे होता है सिलेक्शन? भत्तों के अलावा क्या क्या मिलती है खास सुविधाएं

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) कमांडो को ट्रेनिंग के दौरान 18,000 रुपये प्रति माह का स्टाइपेंड मिलता है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उनकी सैलरी 40,000 से 85,000 रुपये प्रति माह के बीच होती है।
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एनएसजी यानी राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड भारत का एक विशेष सैन्य बल है। इस स्पेशल फोर्स को आतंकवाद या किसी गंभीर आंतरिक खतरों से निपटने के लिए बनाया गया है।नेशनल सिक्योरिटी गार्ड को ब्लैक कैट कमांडो के नाम से जाना जाता है लेकिन क्या आप जानते है कि एनएसजी कमांडो कितनी सैलरी मिलती है और इनकी भर्ती कैसी की जाती है।

NSG कमांडो बनने के लिए पहले भारतीय सेना या किसी CAPF में भर्ती होना पड़ती है। इसके बाद ही इंडियन आर्म्ड या पैरामिलिट्री फोर्स जैसे आर्मी, सीआरपीएफ, बीएसएफ के जवानों में से ही एनएसजी कमांडो का चयन किया जाता है।अगर कोई अधिकारी पद पर NSG में जाना चाहता है तो उसे 10वीं-12वीं के अलावा ग्रेजुएशन और UPSC की NDA या CDS परीक्षा पास करनी होती है।चयन प्रक्रिया में सबसे पहले कैंडिडेट की सेवा रिपोर्ट, शारीरिक और चिकित्सा फिटनेस की जांच की जाती है।

ये होते है प्रमुख काम

एनएसजी कमांडो टेररिज्म और वीआईपी और वीवीआईपी शख्सियतों को सुरक्षा देने का काम करते हैं।कमांडो आतंकवाद से लड़ने और हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन्स में हिस्सा लेते हैं। योग्यता की बात करें तो मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट, 35 वर्ष से कम उम्र, भारतीय सशस्त्र बलों या पुलिस बल में कम से कम तीन साल की सेवा और सबसे जरूरी शारीरिक और चिकित्सा रूप से पूरी तरह से फिट होना जरूरी है। एनएसजी कमांडो बनने के लिए आपकी उम्र 35 वर्ष से कम होनी चाहिए।

NSG कमांडो की सैलरी कितनी होती है? 

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) कमांडो को ट्रेनिंग के दौरान 18,000 रुपये प्रति माह का स्टाइपेंड मिलता है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद, उनकी सैलरी 40,000 से 85,000 रुपये प्रति माह के बीच होती है। ग्रुप कमांडर की सैलरी 1 लाख रुपये और स्क्वॉड्रन कमांडर की 90 हजार रुपये प्रति माह होती है।NSG में शामिल होने के बाद अतिरिक्त भत्ते और सुविधाएं भी मिलती हैं जैसे यात्रा भत्ता, महंगाई भत्ता, मुफ़्त राशन, कैंटीन सुविधा, सरकारी आवास, मुफ़्त शिक्षा, चिकित्सा सुविधाएं, पेंशन।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्त्रोतो से जुटाई गई है, जिसमें बदलाव हो सकता है।

Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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