क्या आप जानते है SPG कमांडो को कितनी मिलती है सैलरी? कैसे होता है सिलेक्शन? भत्तों के अलावा क्या क्या मिलती है सुविधाएं, जानें यहां सबकुछ

SPG में अलग अलग पदों पर तैनात कर्मचारियों का वेतनमान उनके पद, अनुभव और सर्विस एक्सपीरियंस के आधार पर अलग अलग हो सकता है। SPG सुरक्षा अधिकारियों का वार्षिक वेतन 8 लाख रुपये से 12 लाख रुपये के बीच होता है, जो उनके रैंक और अनुभव पर निर्भर करता है।
SPG Commando

SPG Salary Allowance : भारत के प्रधानमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा विशेष सुरक्षा समूह यानी Special Protection Group (SPG) के पास होता है, जिसे देश के सबसे संवेदनशील सुरक्षा दलों में से एक माना जाता है लेकिन क्या आप जानते है कि SPG कमांडो की सैलरी कितनी होती है और उनका सिलेक्शन किस आधार पर किया जाता है।अगर नहीं तो चलिए इस खबर में आपको बताते हैं पूरी जानकारी..

एसपीजी कंमाडों के लिए कैंडिडेट्स का सेलेक्शन डायरेक्ट नहीं किया जाता है। एसपीजी कमांडो की भर्ती भारतीय पुलिस सेवा, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों से की जाती है, इसके लिए उम्मीदवारों को 90 दिन की कड़ी ट्रेनिंग से गुजरना होता है।एसपीजी कामांडो की हाइट कम से कम 170 सेमी होनी चाहिए

एसपीजी कमांडो की सैलरी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसपीजी में अलग-अलग रैंक, पद, अनुभव और सर्विस एक्सपीरियंस के आधार से सैलरी अलग-अलग होती है।एसपीजी कमांडो की सैलरी लगभग 84,236 रुपये से 2 लाख 44 हजार रुपये तक हो सकती है। 11 से 20 साल के अनुभव वाले SPG सुरक्षा अधिकारियों का वार्षिक वेतन 8 लाख रुपये से 18 लाख रुपये के बीच हो सकता है।हालांकि, SPG के उच्च पदों, जैसे सुरक्षा इंचार्ज या निदेशक, का वेतनमान सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं होता है. क्योंकि यह गोपनीयता के दायरे में आता है।

ड्रेस अलाउंस और अन्य मिलने वाले लाभ

कमांडो को कई प्रकार के भत्ते भी मिलते हैं जैसे विशेष भत्ते, जोखिम भत्ता और अन्य लाभ। ऑपरेशनल ड्यूटी पर तैनात कमांडो को हर वर्ष 27,800 रुपये का ड्रेस अलाउंस मिलता है, जबकि नॉन ऑपरेशनल ड्यूटी पर तैनात कमांडो को 21,225 रुपये प्रति वर्ष का अलाउंस मिलता है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्त्रोतो से जुटाई गई है, जिसमें बदलाव हो सकता है।

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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