नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राजधानी के लाखों लोगों को बड़ी राहत देते हुए पानी के बिल पर लेट फीस माफी योजना (LPSC) की समय सीमा 15 अगस्त तक बढ़ा दी है। शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि बिलिंग प्रणाली में सुधार लाने और इसे पारदर्शी बनाने के लिए अब उपभोक्ताओं का KYC वेरिफिकेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है।
जल मंत्री ने कहा कि LPSC योजना की सफलता से यह स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली के लोग अपने बकाया बिलों का ईमानदारी से भुगतान करना चाहते हैं, लेकिन पुरानी और खराब बिलिंग व्यवस्था एक बड़ी बाधा थी।
बिलिंग सिस्टम में होगा बड़ा सुधार
सरकार अब दिल्ली जल बोर्ड की पूरी बिलिंग व्यवस्था को आधुनिक बना रही है। मंत्री ने कहा, “हमारी जो जल बोर्ड की बिलिंग व्यवस्था थी, वह काफी खराब थी। सॉफ्टवेयर बहुत पुराने हो चुके थे, जिन्हें अब अपडेट किया जा रहा है। हम पूरे बिलिंग सिस्टम को नया कर रहे हैं ताकि बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और सटीक हो सके।” KYC प्रक्रिया इसी सुधार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
‘पिछली सरकारें डराने के लिए भेजती थीं लाखों के बिल’
जल मंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लोगों को डराने के लिए छोटे घरों में भी लाखों रुपये के पानी के बिल भेजती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में चुनाव के दौरान इन्हीं बिलों को माफ करने का झूठा वादा किया जाता था। उन्होंने यह भी बताया कि पिछली सरकार के दौरान ब्याज दर 36% तक पहुंच गई थी, जिसे हमारी सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहली ही बैठक में काफी कम कर दिया था।
अब तक 3.30 लाख लोगों ने उठाया लाभ
योजना के असर पर जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि कुल 14.68 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर पानी का बिल बकाया था। उन्होंने कहा, “इस योजना का अब तक 3.30 लाख से ज्यादा लोग (लगभग 20%) फायदा उठा चुके हैं।” आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में योजना शुरू होने के बाद से अब तक घरेलू उपभोक्ताओं का 1493 करोड़ रुपये का सरचार्ज माफ किया जा चुका है। इसके एवज में दिल्ली जल बोर्ड को पुराने बिलों के भुगतान से गुरुवार शाम तक 430 करोड़ रुपये का राजस्व भी प्राप्त हुआ है।
सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से न केवल उपभोक्ताओं को राहत देना है, बल्कि KYC प्रक्रिया के जरिए बिलिंग सिस्टम को पूरी तरह से ठीक करना भी है, ताकि भविष्य में गलत बिलों की समस्या खत्म हो सके।





