Hindi News

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से ज्यादा देशों के लिए संसदीय मैत्री समूहों का किया गठन, भारत की वैश्विक कूटनीति को मिलेगी नई धार

Written by:Gaurav Sharma
Published:
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत की अंतर-संसदीय कूटनीति को मजबूत करने के लिए एक बड़ी पहल की है। इसके तहत अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और इजराइल समेत 60 से अधिक देशों के लिए संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया गया है। इन समूहों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ सांसदों को शामिल किया गया है, ताकि वैश्विक मंच पर भारत की एकजुट आवाज पेश की जा सके।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से ज्यादा देशों के लिए संसदीय मैत्री समूहों का किया गठन, भारत की वैश्विक कूटनीति को मिलेगी नई धार

भारत की वैश्विक और संसदीय कूटनीति को एक नई दिशा देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के लिए संसदीय मैत्री समूहों (Parliamentary Friendship Groups) का गठन किया है। इस ऐतिहासिक पहल का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर की संसदों के साथ संवाद को गहरा करना और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाना है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुदलीय वैश्विक आउटरीच पहल को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इन समूहों की सबसे खास बात यह है कि इनमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों को जगह दी गई है। यह भारतीय लोकतंत्र की समावेशी और बहुदलीय प्रकृति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है, साथ ही यह संदेश भी देता है कि राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर भारत की राजनीतिक पार्टियां एकजुट हैं।

विपक्ष और सत्ता पक्ष के दिग्गज एक साथ

इन मैत्री समूहों में जिन वरिष्ठ सांसदों को शामिल किया गया है, वे विभिन्न दलों और विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रमुख नामों में भाजपा के रविशंकर प्रसाद और अनुराग ठाकुर, कांग्रेस के पी. चिदंबरम, शशि थरूर और गौरव गोगोई, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और राम गोपाल यादव शामिल हैं।

इसके अलावा डीएमके से टी.आर. बालू और कनिमोझी, टीएमसी से डेरेक ओ’ब्रायन, एनसीपी से सुप्रिया सुले, एआईएमआईएम से असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के मनीष तिवारी जैसे बड़े नेता भी इन समूहों का हिस्सा हैं। यह विविधता सुनिश्चित करेगी कि वैश्विक मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती और सर्वसम्मति से रखा जाए।

किन देशों पर है भारत का फोकस?

पहले चरण में 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूह बनाए गए हैं, जिनमें दुनिया के लगभग सभी प्रमुख देश शामिल हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • प्रमुख वैश्विक शक्तियां: अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया।
  • पड़ोसी देश: श्रीलंका, भूटान और नेपाल।
  • प्रमुख साझेदार: इज़राइल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील।
  • यूरोपीय देश: स्विट्जरलैंड, इटली, ग्रीस और यूरोपीय संसद।

आने वाले समय में इस सूची में और भी देशों को शामिल करने की योजना है, जिससे भारत के संसदीय कूटनीति का दायरा और भी व्यापक हो जाएगा।

मैत्री समूहों का मकसद क्या है?

इन समूहों का गठन केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे रणनीतिक उद्देश्य हैं। इनका लक्ष्य पारंपरिक कूटनीति के साथ-साथ ‘पार्लियामेंट-टू-पार्लियामेंट’ और ‘पीपल-टू-पीपल’ कनेक्ट को बढ़ावा देना है।

इन मंचों के माध्यम से सांसद सीधे एक-दूसरे से संवाद कर सकेंगे, विधायी अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करेंगे। इसके अलावा व्यापार, प्रौद्योगिकी, सामाजिक नीति, संस्कृति और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों पर भी सार्थक चर्चा को आगे बढ़ाया जाएगा। यह पहल भारत के द्विपक्षीय संबंधों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में सहायक होगी।

मध्य प्रदेश से जुड़ी विश्वसनीय और ताज़ा खबरें MP Breaking News in Hindi यहां आपको मिलती है MP News के साथ साथ लगातार अपडेट, राजनीति, अपराध, मौसम और स्थानीय घटनाओं की सटीक जानकारी। भरोसेमंद खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें और अपडेटेड रहें !
Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
Follow Us :GoogleNews