महाराष्ट्र की माझी लाडकी बहिन योजना में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है। इस योजना के तहत 14,298 पुरुषों ने गलत तरीके से लाभ उठाया, जो विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए शुरू की गई थी। महिला एवं बाल विकास विभाग की ऑडिट में पाया गया कि इन पुरुषों ने ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली में हेरफेर कर खुद को महिला लाभार्थी के रूप में दर्ज किया, जिसके कारण 21.44 करोड़ रुपये का गलत भुगतान हुआ। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि इन पुरुषों से राशि वसूली जाएगी और असहयोग करने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
योजना में अन्य अनियमितताएं भी सामने आई हैं। डब्ल्यूसीडी की रिपोर्ट के अनुसार, पहले वर्ष में 1640 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा 7.97 लाख महिलाओं द्वारा तीसरे परिवार सदस्य के रूप में पंजीकरण से हुआ, जो योजना के नियमों के खिलाफ है। यह केवल दो महिलाओं प्रति परिवार तक सीमित है। इस उल्लंघन से 1,196 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। 65 वर्ष से अधिक उम्र की 2.87 लाख महिलाओं को 431.7 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जो आयु सीमा के नियमों का उल्लंघन है।
किस तरह के आरोप
चार पहिया वाहन वाले 1.62 लाख परिवारों की महिलाओं को भी लाभ मिला जो योजना की शर्तों के अनुसार अयोग्य हैं। इन खुलासों ने विपक्षी दलों से तीखी आलोचना और व्यापक जांच की मांग को जन्म दिया है। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुळे ने इस धोखाधड़ी के पीछे बड़ी साजिश की आशंका जताते हुए पंजीकरण के लिए जिम्मेदार कंपनी की जांच और एसआईटी या ईडी से मामले की तहकीकात की मांग की है।
व्यापक समीक्षा के आदेश
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिसंबर 2024 में योजना की व्यापक समीक्षा के आदेश दिए थे। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने जनवरी 2025 में सुधारात्मक कार्रवाई का वादा किया। फरवरी तक 5 लाख अयोग्य लाभार्थियों के नाम हटा दिए गए। तटकरे ने बताया कि सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग ने 26.34 लाख अपात्र लाभार्थियों की पहचान की, जिनके लाभ जून 2025 से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए गए। 2.25 करोड़ पात्र लाभार्थियों को जून 2025 का मानदेय वितरित किया गया है।






