
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने अपनी भूख हड़ताल को और तेज करते हुए सोमवार से पानी पीना बंद करने और ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण के लिए सरकार के किसी भी दबाव का सामना करने की कसम खाई है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से मांग की है कि वह मराठा समुदाय को कुंबी के रूप में मान्यता देते हुए मौजूदा रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी आदेश (जीआर) जारी करे। जरांगे ने दावा किया कि 58 लाख रिकॉर्ड मौजूद हैं, जो मराठों को कुंबी के रूप में दर्शाते हैं और सरकार को इसे लागू करना चाहिए ताकि मराठा समुदाय को ओबीसी कोटा मिल सके।
राज्य सरकार ने रविवार को कहा कि वह मराठा समुदाय के लिए कुंबी स्थिति लागू करने के लिए हैदराबाद गजेटियर पर कानूनी राय लेगी। हालांकि, जरांगे इससे संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने कहा कि वह मुंबई के आजाद मैदान में अपने प्रदर्शन स्थल से तब तक नहीं हटेंगे, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, भले ही सरकार बल प्रयोग करे। उन्होंने यह भी कहा कि मराठों को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण मिलने से कोई नहीं रोक सकता।
कानूनी बाधाओं से बचना होगा
मराठा आरक्षण मुद्दे पर कैबिनेट उप-समिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि वे इस मामले में कानूनी बाधाओं से बचने के लिए राज्य के महाधिवक्ता से परामर्श करेंगे। उप-समिति ने हैदराबाद और सतारा गजेटियर के कार्यान्वयन पर चर्चा की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के अवलोकन के कारण मराठों को कुंबी के रूप में मान्यता देना जटिल है। विखे पाटिल ने कहा कि वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे ताकि कोई समाधान निकाला जा सके।
शरद पवार के खिलाफ नारेबाजी
इस बीच, मराठा प्रदर्शनकारियों ने एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले की कार को रोककर शरद पवार के खिलाफ नारेबाजी की। सुले ने सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और सर्वदलीय बैठक कर इस जटिल मुद्दे को हल करने की मांग की। दूसरी ओर, ओबीसी कोटे के कमजोर होने के विरोध में एनसीपी मंत्री छगन भुजबल ने ओबीसी नेताओं की बैठक बुलाई है। हजारों मराठा समुदाय के लोग आजाद मैदान और सीएसटी स्टेशन के आसपास डेरा डाले हुए हैं और बीएमसी ने उनकी सुविधा के लिए स्वच्छता और शौचालय की व्यवस्था की है।
