
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 साल पूरे होने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि RSS की राष्ट्रसेवा की यात्रा पर देश को गर्व है। लेकिन कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
संदीप दीक्षित ने न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में कहा,
“RSS तो एक फर्जी संस्था है। इसका न कोई रजिस्ट्रेशन है, न बैंक अकाउंट। ये लोग फर्जी नाम से संस्था चला रहे हैं और 100 साल का उत्सव मना रहे हैं।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर RSS देश सेवा करती है तो उनकी धन-संपत्ति और फंड कहां से आता है? उन्होंने कहा कि “100 साल में न रजिस्टर हुई, न पारदर्शिता है, तो इसका कैसा उत्सव?”
GST में बदलाव की घोषणा पर जताई चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में GST दरों में कमी की बात कही थी। उन्होंने कहा कि दिवाली तक आम लोगों और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों) को राहत देने के लिए GST की दरें कम की जाएंगी। लेकिन संदीप दीक्षित ने इस पर भी तंज कसते हुए कहा, “जब भी प्रधानमंत्री किसी चीज में बदलाव करते हैं, हालात और बिगड़ जाते हैं।”
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के अब तक के कई फैसलों से देश को नुकसान ही हुआ है। “मैं तो प्रार्थना करूंगा कि कोई बदलाव न हो, क्योंकि इनके बदलावों से देश को नुकसान होता है।”
खरगे और राहुल गांधी के लाल किला न जाने पर बोले
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे विपक्षी नेता इस बार लाल किले के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
इस पर भी संदीप दीक्षित ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “पिछली बार राहुल गांधी को तीसरी या चौथी लाइन में बैठाया गया था, जो कि सामान्यत: किसी मंत्री को भी नहीं बैठाया जाता। यह जानबूझकर किया गया असम्मान था।” उन्होंने कहा कि “अगर सरकार विपक्षी नेताओं के साथ ऐसा बर्ताव करती है, तो बेहतर है कि वे घर से ही भाषण सुन लें।”
RSS की भूमिका पर कांग्रेस का पुराना रुख
कांग्रेस और RSS के बीच विचारधारा की लड़ाई कोई नई बात नहीं है। कांग्रेस लंबे समय से RSS को गैर-संवैधानिक और सांप्रदायिक संगठन मानती रही है। संदीप दीक्षित के बयान इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।
उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि “अगर कोई संस्था देश की सेवा करती है तो पारदर्शिता जरूरी है। RSS आज तक अपने फंड और संगठनात्मक ढांचे को लेकर पारदर्शी नहीं रही है।”
