बजट 2020: बैंकों में जमा पैसों पर इंश्योरेंस कवर 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये

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नई दिल्ली।
बजट में सरकार ने आपके बैंक डिपॉजिट को लेकर बड़ा ऐलान किया है। बैंकों में पैसा जमा कराने वालों के लिए इंश्योरेंस कवर 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। अगर बैंक डूबता है तो आपकी 5 लाख रुपये तक की जमा रकम आपको वापस मिल जाएगी, इतनी रकम सुरक्षित रहेगी।

पंजाब ऐंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC) से जुड़े मामले में सरकार और आरबीआई को आलोचना का सामना करना पड़ा था। पिछले साल सितंबर में PMC बैंक का कामकाज बंद हो गया था। इससे हजारों जमाकर्ता फंस गए थे। बहरहाल, इस मोर्चे पर वित्त मंत्री ने उम्मीद से ज्यादा दिया। आपकी सुरक्षित जमा राशि अब 1 लाख की बजाय 5 लाख रुपये होगी। अभी तक DICGC ऐक्ट 1961 के तहत एक लाख रुपये तक की जमा रकम पर इंश्योरेंस कवर है और अगर बैंक डूब जाए तो इस लिमिट से आगे की जमा रकम की वापसी की गारंटी नहीं है। यह कम्पनसेशन तय किए हुए 25 साल से ज्यादा हो चुके हैं।

जमा बीमा क्या होता है
इस बीमा का मतलब यह भी है कि जमा राशि कितनी भी हो ग्राहकों को 1 लाख रुपये ही सरकार देती है। रिजर्व बैंक की सब्सिडियरी डिपॉजिट इंश्योरेंस ऐंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) ने बर्बाद होने वाले बैंकों से ग्राहकों को बचाने के लिए एक अलग रिजर्व बना रखा है। इस बीमा को बढ़ाने की मांग काफी समय से की जा रही है, क्योंकि अब के समय के हिसाब से 1 लाख रुपये की राशि ज्यादा नहीं है और सुरक्ष‍ित निवेश होने के नाते ज्यादातर लोग अपनी गाढ़ी कमाई बैंकों में ही रखते हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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