इंदिरा गांधी के इस फैसले को पलटेगी मोदी सरकार? श्रीलंका के साथ कच्चाथीवू द्वीप को लेकर चर्चा कर सकते हैं PM मोदी

नरेंद्र मोदी सरकार (Modi government) शुरुआत से ही इंदिरा गांधी के एक फैसले का विरोध करती रही है। अब इस मामले में बड़ा मोड़ आ सकता है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका दौरे पर कच्चाथीवू द्वीप को लेकर चर्चा कर सकते हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इंदिरा गांधी द्वारा समझौते में दिए गए कच्चाथीवू द्वीप को नरेंद्र मोदी की सरकार फिर से भारत का हिस्सा बना पाएगी?
इंदिरा गांधी के इस फैसले को पलटेगी मोदी सरकार? श्रीलंका के साथ कच्चाथीवू द्वीप को लेकर चर्चा कर सकते हैं PM मोदी

पिछले लंबे समय से कच्चाथीवू द्वीप को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। दरअसल, 1974 में इंदिरा गांधी सरकार ने भारत का एक हिस्सा श्रीलंका को दे दिया था। यह मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से ही उठाते रहे हैं। संसद भवन में इस विषय पर नरेंद्र मोदी सरकार (Modi government) द्वारा कई बार चर्चा की जा चुकी है। यह द्वीप रामेश्वरम के नजदीक स्थित है। 2014 में जब नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में आई, तब से ही इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।

अब जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका दौरे पर पहुंचे हैं, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि वे कच्चाथीवू मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं। लेकिन सभी के मन में यह सवाल है कि क्या सच में भारत को एक बार फिर कच्चाथीवू द्वीप मिल सकता है?

क्या है कच्चाथीवू द्वीप का इतिहास? यहां जानिए (Modi government)

कच्चाथीवू द्वीप 285 एकड़ में फैला हुआ है, जो बंगाल की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ता है। यह भारत के तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र ‘पार्क स्ट्रेट’ में स्थित है। यहां पर न सिर्फ कच्चाथीवू, बल्कि और भी कई द्वीप मौजूद हैं, लेकिन भारत के लिए सबसे अहम कच्चाथीवू द्वीप है। दरअसल, चौदहवीं शताब्दी के दौरान एक ज्वालामुखी विस्फोट के कारण इस द्वीप का निर्माण हुआ था। यह रामेश्वरम से 19 किलोमीटर तथा श्रीलंका के जाफना जिले से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित है। 1974 से 1976 के बीच इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान श्रीलंका की प्रधानमंत्री श्रीमावो भंडारनायके के साथ चार समुद्री जल समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिनके तहत भारत ने इस द्वीप को श्रीलंका को सौंप दिया था। तब से ही श्रीलंका इस द्वीप पर कानूनी दावा करता रहा है।

तमिलनाडु सरकार भी मोदी के साथ?

लेकिन इस समझौते का विरोध तमिलनाडु सरकार द्वारा शुरुआत से ही किया गया है। तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को एक पत्र भी लिखा था, जिसमें इस द्वीप को रामनाथ साम्राज्य की जमींदारी का हिस्सा बताया गया था और किसी भी हालत में इसे श्रीलंका को न देने की बात कही गई थी। लेकिन 2009 के बाद श्रीलंका की नौसेना ने द्वीप पर जाने वाले भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। वहीं, 2023 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था, जिसमें इस द्वीप को वापस लाने की मांग की गई थी। अब ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महत्वपूर्ण द्वीप को लेकर श्रीलंका के साथ चर्चा कर सकते हैं।

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4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

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