Nirbhaya Case: दोषियों की फांसी पर हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

Nirbhaya Case: दोषियों की फांसी पर हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

नई दिल्ली: निर्भया गैंगरेप केस में दोषियों की फांसी पर रोक मामले की दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई। जिसके बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले कोर्ट में केंद्र का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दोषी की ओर से जानबूझकर देरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि न्याय हित में फांसी देने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। दोषियों को फांसी जल्द से जल्द देना चाहिए। तुषार मेहता ने कहा कि दोषियों की हरकतें बहुत घृणित थीं और समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया था। इसलिए उनकी फांसी में देरी नहीं की जा सकती। इस तरह की देरी का समाज के साथ ही दोषियों पर भी अमानवीय प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पवन गुप्ता की रिव्यू पिटीशन खारिज हो चुकी है। वह क्यूरेटिव और दया याचिका अभी तक फाइल नहीं किया है।

दोषियों के इरादे खतरनाक

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि दोषी मुकेश की ओऱ से निचली अदालत में कहा कि गया वह दया यायिका नए सिरे से दाखिल करने पर विचार कर रहा है। जबकि नए सिरे दया याचिका तभी दायर की जा सकती है जब उसमें किसी तरह की बदलाव की जरुरत हो। इससे साफ है कि दोषी के इरादे कितने घातक हैं।

दोषियों के वकील एपी सिंह ने किया बचाव

दोषी विनय, अक्षय और पवन के लिए बहस करते हुए बचाव दल के वकील एपी सिंह ने कोर्ट में तर्क दिया कि जेल के नियम 836 और 858 दोषियों को यह अधिकार देते हैं कि वह बचे हुए अपने कानूनी विकल्प का इस्तेमाल करें। शत्रुघ्न बनाम यू.ओ.आइ का तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि संविधान में फांसी देने के लिए कोई निर्धारित समय नहीं दिया गया है। केवल दया याचिका खारिज होने के बाद भी फांसी देने के लिए 14 दिन का समय मिलता है। केवल इसी मामले में इतनी जल्दबाजी क्यों।

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