बिहार की सियासत में इस समय भूचाल की स्थिति है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करना राजनीतिक गलियारों में बड़ा सरप्राइज साबित हुआ है और इसे लेकर विरोध जारी है। एक तरफ जेडीयू कार्यकर्ता और समर्थक इस फैसले का जमकर विरोध कर रहे हैं, वहीं अब उनके परिवार के सदस्य भी इसे साज़िश करार दे रहे हैं।
नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने पर उनके बहनोई अनिल कुमार ने कहा है कि कार्यकर्ता स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि इसमें संजय झा और ललन (राजीव रंजन) सिंह शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह बिना किसी साजिश के नहीं हो सकता और सभी इन दोनों का नाम ले रहे हैं। उन्होंने कहा ‘कोई तो खेला हुआ है’।
नीतीश कुमार के बहनोई ने लगाया साज़िश का आरोप
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर अब उनके परिवार से भी असहमति सामने आने लगी है। मुख्यमंत्री के बहनोई अनिल कुमार ने आरोप लगाया है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे साजिश हो सकती है और पार्टी के कुछ नेताओं की भूमिका पर कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं। एएनआई से बातचीत में अनिल कुमार ने कहा कि जेडीयू के कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि इस पूरे मामले में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह (राजीव रंजन सिंह) और सांसद संजय सिंह का नाम लिया जा रहा है। उनका कहना है कि यह फैसला सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया नहीं लग रहा। अनिल कुमार ने कहा कि “कार्यकर्ताओं का तो साफ कहना है कि ललन सिंह और संजय झा सब कर रहे हैं। टिकट बंटवारे के समय से ही यह सब शुरू हुआ। बिना किसी साजिश के यह नहीं हो सकता। सिर्फ एक सौ दस दिन में वो राज्यसभा कैंडिडेट क्यों बनेंगे। यहां पूरी पार्टी में रावण बैठ गया हैं।”
मुख्यमंत्री के फैसले को लेकर जारी है विरोध
बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 5 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद से फैसले का बड़े पैमाने पर विरोध शुरु हो गया है। पटना में जेडीयू के नाराज कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सीएम हाउस और पार्टी कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। इसी के साथ पार्टी दफ्तर सहित कई स्थानों पर पोस्टर भी लगाए गए हैं जिसमें मुख्यमंत्री से फैसले पर दोबारा सोचने का आग्रह किया गया है। कुछ जगहों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्टरों पर कालिख पोते जाने की भी खबरें भी आई है। उधर विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं का आरोप है कि यह फैसला राजनीतिक दबाव का परिणाम हो सकता है। कांग्रेस भी इसे लेकर लगातार सवाल कर रही है।






