यहां पर अब नहीं चलेगा ‘गोरखधंधा’, प्रदेश सरकार ने लगाया बैन

यहां पर अब नहीं चलेगा ‘गोरखधंधा’, प्रदेश सरकार ने लगाया बैन

चंडीगढ़, डेस्क रिपोर्ट। एक महत्वपूर्ण निर्णय में हरियाणा सरकार ने ‘गोरखधंधा’ शब्द पर बैन लगा दिया है। दरअसल इसे नाथ समुदाय ने अपने गुरु गोरखनाथ का अपमान बताया था और मुख्यमंत्री से इस शब्द के उपयोग पर रोक लगाने की मांग की थी।

हरियाणा में अब किसी भी तरह के गलत कामों के लिए गोरखधंधा शब्द का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। दरअसल आमतौर पर अभी ठगी, धोखाधड़ी या किसी के साथ चीटिंग जैसे मामलों में गोरखधंधा जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। अनैतिक कामों को भी गोरखधंधा कहा जाता है। इसे लेकर नाथ समुदाय के लोग मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मिले थे और उन्होंने इसे अपने गुरु गोरखनाथ का अपमान बताते हुए शब्द के प्रयोग पर रोक लगाने की मांग की थी।

ये कहा जाता है कि इस शब्द का ही दुरुपयोग किया गया क्योंकि मूलत यह शब्द नाथ संप्रदाय के गुरु गोरखनाथ की योग साधना से जुड़ा हुआ है। 9वीं सदी में नाथ संप्रदाय के गुरु गोरखनाथ ने संसार को बहुत सारी योग साधनाएं और आसन दिए थे जिन्हें गोरखधंधा कहा जाता था और धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल गलत कार्यों के लिए होने लगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा सांसद बाबा बालक नाथ भी गोरखनाथ संप्रदाय से ही आते हैं।

कौन हैं बाबा गोरखनाथ

गोरखनाथ या गोरक्षनाथ जी महाराज प्रथम शताब्दी के पूर्व नाथ योगी के थे, जिसका प्रमाण है राजा विक्रमादित्य के द्वारा बनाया गया पंचांग जिन्होंने विक्रम संवत की शुरुआत प्रथम शताब्दी से की थी जब कि गुरु गोरक्ष नाथ जी राजा भर्तृहरि एवं इनके छोटे भाई राजा विक्रमादित्य के समय में थे। गुरु गोरखनाथ जी ने पूरे भारत का भ्रमण किया और अनेक ग्रन्थों की रचना की। गोरखनाथ जी का मन्दिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर में स्थित है। गोरखनाथ के नाम पर इस जिले का नाम गोरखपुर पड़ा है। गोरखनाथ के शिष्य के नाम भैरौंनाथ था जिनका उद्धार माता वैष्णोदेवी ने किया था| पुराणों के अनुसार भगवान शिव के अवतार थे।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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