
अगर किसी से पूछा जाए कि दूध वेज है या नॉनवेज, तो लगभग सभी यही उत्तर देंगे कि दूध वेज में आता है। लेकिन बेहद कम लोग यह जानते हैं कि एक ऐसा भी दूध है जिसे नॉनवेज दूध कहा जा रहा है, और इस नॉनवेज दूध के चलते आज दुनिया के दो सबसे बड़े देश आमने-सामने आ गए हैं। दरअसल, हम जो दूध पीते हैं या जिससे चाय बनाते हैं या फिर जिसकी काफी या पनीर बनाते हैं, वह सभी के घर में उपलब्ध होता है। लेकिन नॉनवेज दूध का नाम सुनकर अब कई लोग हैरान हैं और यह जानना चाहते हैं कि आखिर इसे लेकर दो देश आमने-सामने कैसे आ गए हैं।
चलिए आज हम आपको इस खबर में बताएंगे कि यह नॉनवेज दूध का पूरा मामला क्या है और इसे लेकर भारत और अमेरिका आमने-सामने क्यों हैं। क्या यह दूध भारत आ गया तो देश के किसानों को लगभग एक लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है? चलिए इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं।
जानिए क्या है नॉनवेज दूध?
दरअसल, जिस प्रकार से भारत में गाय को बेहद पवित्र पशु माना जाता है और उसे घास-फूस, खली और अनाज जैसी चीजें खिलाई जाती हैं, तो उसका दूध बेहद शुद्ध आता है। लेकिन अमेरिका में डेयरी फार्म एक बड़ा बिजनेस बन चुका है। इन देशों में ज्यादा दूध लेने के लिए गायों को हाई-प्रोटीन डाइट प्रदान की जाती है। इन डाइट में चारे के साथ-साथ कई ऐसे प्रोटीन सोर्स उपलब्ध कराए जाते हैं जिनसे दूध ज्यादा निकले। जानकारी के मुताबिक, यह प्रोटीन जानवरों के सोर्स से आता है। गायों को चारे में मिलाकर मांस, हड्डियों का चूरा और अन्य जानवरों का खून भी खिलाया जाता है। जब गाय ये चीजें खाती है, तो उसके दूध को भारत में नॉनवेज दूध कहा जा रहा है।
क्यों दो देश आए आमने सामने?
वहीं अब इसे लेकर ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट के अजय श्रीवास्तव ने इस मुद्दे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जिस गाय का हम मक्खन या दूध खा रहे हैं, उस गाय ने दूसरी गाय का मांस और खून खाया था। भारत इसकी इजाजत शायद ही कभी देगा। अब भारत और अमेरिका इस वजह से आमने-सामने आ चुके हैं। जानकारी दे दें कि वर्ल्ड एटलस की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 38% आबादी शाकाहारी है। दुनिया में सबसे ज्यादा शाकाहारी लोग भारत में ही रहते हैं। हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। गाय का दूध पूजा-पाठ में इस्तेमाल किया जाता है। अब ऐसे में अगर नॉनवेज दूध का मुद्दा उठ रहा है, तो यह सोचने वाली बात है।
भारत का क्या है कहना?
हालांकि इसे देखते हुए अब भारत सरकार ने इसे “नो-नेगोशिएबल रेड लाइन” बना दिया है। अब भारत ने साफ कर दिया है कि अमेरिका से आने वाले सभी डेयरी प्रॉडक्ट्स के लिए एक सख्त सर्टिफिकेट देना होगा। दरअसल, इन सर्टिफिकेट्स का मतलब होगा कि जिन गायों का दूध भारत में भेजा जा रहा है, उन्होंने कभी मांस, बोन मील, ब्लड मील या किसी दूसरे जानवर के अंगों से बना चारा नहीं खाया है। जब तक अमेरिका की ओर से इसे स्पष्ट नहीं किया जाता, तब तक भारत में अमेरिका से आने वाले डेयरी प्रॉडक्ट्स पर प्रतिबंध है।
4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

