बिजली विभाग में माचिस लौटाने के लिए पत्र, लिखा ‘मॉर्टिन सुलगाने में हो रही दिक्कत’

बिजली विभाग में माचिस लौटाने के लिए पत्र, लिखा ‘मॉर्टिन सुलगाने में हो रही दिक्कत’

Letter to return matchbox : क्या आप ये सोच सकते हैं कि माचिस की 11 तीलियों के लिए सरकारी चिट्ठी-पत्री हो सकती है। माचिस के लेनदेन के लिए किसी सरकारी विभाग में पत्र लिखकर उसे लौटाने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया जाए। सुनने में ये बात अजीब लग सकती है लेकिन ऐसा हुआ है मुरादाबाद में। यहां बिजली विभाग में एक ‘गायब माचिस’ के लिए बाकायदा ऑफिशियल लेटर लिखा गया।

माचिस के लिए चिट्ठी

अगर कोई हमारी माचिस मांगकर ले जाए तो हम क्या करेंगे। आमतौर पर हम दूसरी माचिस ले लेंगे। ये कोई इतनी बड़ी चीज नहीं है जो वापिस मांगी जाए या फिर इसे लेकर बखेड़ा खड़ा किया जाए। लेकिन सरकारी विभाग में जो न हो..कम है। मुरादाबाद के बिजली विभाग में एक माचिस आफत की वजह बन गई है। माचिस लौटाने के लिए पत्र लिखा गया और ये पत्र अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस माचिस की ताप हर जगह फैल गई है और इसे लेकर काफी मजाक भी बनाया जा रहा है। हालांकि ये पत्र कुछ समय पुराना है, लेकिन सोशलम मीडिया पर इसे लेकर अब खूब चर्चा हो रही है।

चिट्ठी में लिखा ये…

मामला 19 तीलियों का है..पत्र में कार्यालय सहायक को लिखा गया है कि ‘विभाग में कार्य का बोझ अत्यधिक हो जाने के कारण देर रात तक दफ्तर में बैठकर कार्य निपटाना पड़ रहा है। दफ्तर में कार्य करते समय आपके द्वारा अधोहस्ताक्षरित से एक माचिच (जिसमें लगभग 19 तीलियां थी) मांगी गई थी जिसे मॉर्टिन को सुलगाने हेतु रखा गया था। परंतु अत्यंत खेद का विषय है कि आपके द्वार उक्त माचिस को लौटाया नहीं गया है जिससे रात बेरात को बिजली जाने पर परेशानी उत्पन्न हो रही है। अत: आपको निर्देशित किया जाता है कि पत्र प्राप्ति के तीन दिवसों के अंदर उक्त माचिस को वापस करना सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में कोई विवाद की स्थिति न बने और आपसी विश्वास बना रहे। अन्यथा की स्थिति में किसी भी कार्यवाही के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे।’

ये पत्र वायरल होने के बाद विभाग की काफी खिल्ली उड़ रही है और लोग इसे लेकर तरह तरह के सवाल भी उठा रहे हैं। हालांकि इसे लेकर विभाग के एक अधिकारी ने सफाई भी दी है और कहा है कि ये पत्र कम्प्यूटर ऑपरेटर को ट्रेनिंग देते समय लिखाया गया है और वास्तविकता में ऐसा कोई पत्र भेजा नहीं गया। लेकिन पत्र पर लगा सील ठप्पा कुछ और ही कहानी कह रहा है। बहरहाल, असलियत हो भी हो लेकिन माचिक की कुछ तीलियों ने आग तो लगा ही दी है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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