
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी
कारगिल विजय दिवस के मौके पर द्रास की वीर भूमि से भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट और मजबूत संदेश दिया। “हमने कायरता का उत्तर पराक्रम से दिया है।” उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान और पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का ज़िक्र करते हुए इसे भारत की संप्रभुता के खिलाफ साजिशों पर निर्णायक प्रहार बताया। सेना प्रमुख ने कहा कि यह ऑपरेशन केवल एक जवाब नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश था, भारत अब आतंकी हमलों के बाद केवल निंदा या शोक तक सीमित नहीं रहेगा। अब हर वार का उत्तर दुगनी ताकत से और सटीकता से दिया जाएगा।
द्रास से सेना प्रमुख का ऐलान
सेना प्रमुख ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था, लेकिन इस बार भारत ने केवल शोक नहीं मनाया, बल्कि कार्रवाई करने का संकल्प लिया। जनरल द्विवेदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर हमारा संकल्प है, हमारा उत्तर है और भारत का स्पष्ट संदेश है। अब आतंकवाद को संरक्षण देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने बताया कि यह पूरा अभियान अत्यंत सटीकता और सावधानी से चलाया गया, जिससे किसी निर्दोष नागरिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। यह भारतीय सेना की नैतिक प्रतिबद्धता और रणनीतिक कौशल का परिचायक है।
ऑपरेशन सिंदूर सेआतंक के अड्डों पर प्रहार
जनरल द्विवेदी ने बताया कि 6-7 मई की रात को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में नौ हाई-वैल्यू आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। यह हमला न केवल सामरिक दृष्टि से अत्यंत सफल रहा, बल्कि यह एक मनोवैज्ञानिक जीत भी थी।
उन्होंने आगे बताया कि जब पाकिस्तान की ओर से 7 से 9 मई के बीच जवाबी सैन्य कार्रवाइयों की कोशिश हुई, तो भारत ने उनका नपा-तुला और सटीक जवाब दिया। इस दौरान भारतीय एयर डिफेंस प्रणाली एक अजेय दीवार की तरह डटी रही और किसी भी ड्रोन या मिसाइल को सीमा पार नहीं करने दिया गया। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत अब अपनी सीमाओं की रक्षा केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति के साथ कर रहा है।
ड्रोन्स, दिव्यास्त्र और ‘भैरव’ यूनिट्स का गठन
सेना प्रमुख ने बताया कि भारतीय सेना को नई तकनीकों और अत्याधुनिक उपकरणों से लैस किया जा रहा है। हर इन्फैंट्री बटालियन में अब ड्रोन प्लाटून की स्थायी तैनाती की जा रही है।। ‘दिव्यास्त्र बैटरियां’ और Loiter Munition Batteries के जरिये आर्टिलरी की मारक क्षमता कई गुना बढ़ाई गई है। वायुसेना और सेना की एयर डिफेंस को स्वदेशी मिसाइल सिस्टम्स से सुसज्जित किया जा रहा है। इसके अलावा, दुश्मन की सीमा के भीतर घातक कार्रवाई के लिए ‘भैरव’ Light Commando Battalions का गठन किया गया है, जो तेज़ गति से हमला करने और शत्रु को अचंभित करने की क्षमता रखती हैं द्विवेदी ने कहा कि यह केवल सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि Whole-of-Nation Approach का नतीजा है, जिसमें सेना, वायुसेना, नौसेना और अन्य विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
राष्ट्र निर्माण में सेना की भागीदारी
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारत की 100वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ (2047) तक “विकसित भारत” का सपना साकार करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि इस महान लक्ष्य को हासिल करने में भारतीय सेना का 1.3 करोड़ का समुदाय जिसमें सैनिक, उनके परिजन, वेटरन्स और वीरगति को प्राप्त शहीदों के परिवार शामिल हैं , सबसे बड़ी ताकत है। लद्दाख जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना न केवल रक्षा कर रही है, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत अब केवल अपनी सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हर मोर्चे पर सशक्त और निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।
कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि यह उस संकल्प और साहस की याद दिलाता है जिससे भारत ने हर बार आतंक और आक्रांताओं को जवाब दिया है। ऑपरेशन सिंदूर और सेना की आधुनिक तैयारियां यह संकेत हैं कि भारत अब सहनशील राष्ट्र नहीं, बल्कि निर्णायक राष्ट्र है, जो हर चुनौती का डटकर सामना करेगा और उसे जवाब भी देगा।
