विपक्षी गठबंधन INDIA ने मतदाता सूची में धांधली के आरोपों को लेकर निर्वाचन आयोग के साथ चल रहे विवाद के बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों ने आज सुबह संसद में हुई अपनी बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के समान है, जिसमें संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत और सिद्ध कदाचार या अक्षमता का आधार आवश्यक है।

यह कदम मुख्य निर्वाचन आयुक्त के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों को संविधान का अपमान बताया। कुमार ने कहा कि निर्वाचन आयोग को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए भारत के मतदाताओं पर निशाना साधने का मंच बनाया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आयोग सभी दलों के लिए निष्पक्ष है और वह सत्तारूढ़ या विपक्षी दलों के बीच भेदभाव नहीं करता।

मतदाता धांधली का आरोप

राहुल गांधी ने हाल ही में कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदाता धांधली का आरोप लगाया था। इसके अलावा, कांग्रेस और उनके सहयोगी आरजेडी ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन को चुनौती दी है, जिसमें दावा किया गया कि निर्वाचन आयोग सत्तारूढ़ बीजेपी को लाभ पहुंचाने के लिए मतदाता सूची में हेरफेर कर रहा है। जवाब में कुमार ने कहा कि लाखों अधिकारियों और बूथ-स्तरीय एजेंटों की मौजूदगी में पारदर्शी प्रक्रिया के साथ वोट चोरी संभव नहीं है।

महाभियोग प्रस्ताव नहीं लाया

विपक्ष के इस कदम पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राज्यसभा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा, “मूर्खों से और क्या उम्मीद की जा सकती है? मुझे आश्चर्य है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के खिलाफ भी महाभियोग प्रस्ताव नहीं लाया।” दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बीजेपी के प्रवक्ता की तरह बात की और विपक्ष संसदीय लोकतंत्र में उपलब्ध हर विकल्प का उपयोग करेगा।