‘धनखड़ साहब का पता चला आजकल कहां हैं’- उपराष्ट्रपति चुनाव पर पवन खेड़ा का तंज

पवन खेड़ा का यह बयान उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों को लेकर विपक्ष की रणनीति का संकेत देता है। विपक्ष फिलहाल उम्मीदवार को लेकर चुप है लेकिन सत्ता पक्ष पर सवाल उठाने और संघ-बीजेपी पर सीधा हमला करने की रणनीति अपना रहा है।
‘धनखड़ साहब का पता चला आजकल कहां हैं’- उपराष्ट्रपति चुनाव पर पवन खेड़ा का तंज

देश में जल्द ही उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारियां शुरू होने वाली हैं। इसी बीच कांग्रेस आईटी सेल के प्रमुख और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने विपक्षी उम्मीदवार को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब सत्ता पक्ष पर हमला करते हुए दिया। जब मीडिया ने उनसे पूछा कि विपक्ष की तरफ से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार कौन होगा, तो खेड़ा ने चुटकी लेते हुए कहा- “पहले यह तो बताइए कि धनखड़ साहब कहां हैं, आजकल दिखते क्यों नहीं? सही वक्त आने पर उम्मीदवार का नाम भी बता देंगे।” खेड़ा ने साफ कहा कि विपक्ष को उम्मीदवार चुनने की कोई जल्दी नहीं है। उन्होंने कहा, “अभी तो बीजेपी और आरएसएस ही यह तय नहीं कर पाए हैं कि उनका उम्मीदवार कौन होगा। ऐसे में हमें क्यों हड़बड़ी करनी चाहिए?”

बीजेपी के भीतर खींचतान का आरोप

पवन खेड़ा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा हमला करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के भीतर ही कई गुट बन चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर नेताओं के बीच आपसी खींचतान और असंतोष साफ झलक रहा है। खेड़ा ने कहा- “बीजेपी में दो-तीन ग्रुप बन गए हैं। नड्डा जी खुद कह रहे हैं कि आखिर कब तक मुझे एक्सटेंशन में रखोगे, भेज दो आगे। वहीं, जब देखते हैं कि धनखड़ साहब गायब हो गए हैं तो डर जाते हैं। पहले बीजेपी को तय करने दीजिए कि वह क्या करने वाले हैं।” उनके इस बयान ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मौजूदा भूमिका और सक्रियता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

RSS पर सीधा वार- ‘कैसा NGO है?’

पवन खेड़ा ने अपने बयान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अगर आरएसएस खुद को NGO कहता है तो उसका पंजीकरण और वित्तीय विवरण कहां है?
उन्होंने कहा- “भगवान हमारे देश और समाज को ऐसे NGO से बचाए, जिसने पहले 25 साल मुखबिरी करते हुए गुजारे, फिर अगले 25 साल संविधान और तिरंगे का अपमान किया। उसके बाद 25 साल मंदिर-मस्जिद की लड़ाई में गुजारे और अब पिछले 25 साल दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के हक छीनने में लगा दिया।” खेड़ा ने कहा कि ऐसा संगठन जितनी जल्दी हो सके, बंद हो जाना चाहिए और यह वक्त जरूर आएगा।

‘रजिस्ट्रेशन कराएंगे, तब देखेंगे होगा या नहीं’

जब उनसे पूछा गया कि अगर इंडिया गठबंधन की सरकार बनी तो क्या आरएसएस पर बैन लगाया जाएगा? इस पर पवन खेड़ा ने कहा कि उनकी पार्टी और गठबंधन का इरादा सीधा है, पहले आरएसएस को कानूनी रूप से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। खेड़ा ने कहा- “हम इन्हें दिखाएंगे कि रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। तब देखेंगे कि इनका रजिस्ट्रेशन होता भी है या नहीं।” यह बयान साफ करता है कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन आने वाले चुनावों में न केवल बीजेपी बल्कि आरएसएस को भी मुख्य मुद्दा बनाकर जनता के सामने जाने की तैयारी में हैं।

पवन खेड़ा का यह बयान उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों को लेकर विपक्ष की रणनीति का संकेत देता है। विपक्ष फिलहाल उम्मीदवार को लेकर चुप है लेकिन सत्ता पक्ष पर सवाल उठाने और संघ-बीजेपी पर सीधा हमला करने की रणनीति अपना रहा है। खेड़ा का तंज “धनखड़ साहब का पता चला क्या” न केवल उपराष्ट्रपति की मौजूदा भूमिका पर सवाल है, बल्कि सत्ता पक्ष की आंतरिक स्थिति को उजागर करने की कोशिश भी है। वहीं, RSS को लेकर उनकी टिप्पणी यह साफ कर देती है कि आने वाले चुनावी माहौल में संघ का मुद्दा फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहेगा।

लेखक के बारे में
Follow Us :GoogleNews