केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की आलोचना को लेकर कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस की प्रतिक्रिया को ‘अंगूर खट्टे हैं’ वाली कहावत जैसा बताया और आरोप लगाया कि UPA सरकार अपने कार्यकाल में डर के कारण इस महत्वपूर्ण समझौते पर निर्णायक कदम नहीं उठा पाई थी।
गुरुवार को एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए गोयल ने कहा कि इस डील पर चर्चा 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन 2013 में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि उस समय की सरकार में डील को अंतिम रूप देने की हिम्मत और इच्छाशक्ति की कमी थी।
‘कांग्रेस का ट्रैक रिकॉर्ड खराब’
पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘विकास विरोधी’ करार दिया। उन्होंने कहा, “पर्यावरण मंत्री के तौर पर उन्होंने देश की विकास यात्रा को रोक दिया था। कांग्रेस पार्टी का ट्रैक रिकॉर्ड खराब है।”
“यह ‘अंगूर खट्टे हैं’ वाली बात है। उस समय की सरकार में डील फाइनल करने की हिम्मत और इच्छाशक्ति नहीं थी। डर के चलते यूपीए और कांग्रेस सरकारें निर्णायक कदम नहीं उठा पाईं।” — पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री
गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चीन के साथ व्यापारिक समझौते को बढ़ावा देकर भारत के आर्थिक हितों को खतरे में डाला था। उन्होंने RCEP (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी) का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस जैसी पार्टियां भारत को इसमें शामिल होने के लिए मजबूर कर रही थीं, जो असल में चीन के साथ एक FTA जैसा था।
जापान-कोरिया FTA का दिया उदाहरण
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के कार्यकाल में हुए व्यापार समझौतों की तुलना करते हुए कहा कि जापान और कोरिया के साथ किए गए FTA बेहद खराब थे। उन्होंने दावा किया कि उन समझौतों के बाद उन देशों में हमारा निर्यात बिल्कुल नहीं बढ़ा, जबकि भारत में उनका निर्यात दोगुना हो गया।
इसके विपरीत, उन्होंने मौजूदा भारत-EU समझौते का बचाव करते हुए कहा, “यहां भारत से निर्यात होने वाली 99% चीजों पर जीरो ड्यूटी लगेगी। हमने अपनी शर्तों पर विकसित देशों के साथ संतुलित समझौते पर बातचीत की है।”
अर्थव्यवस्था पर भी दिया जवाब
गोयल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘भारतीय अर्थव्यवस्था मर चुकी है’ वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और कोई अन्य देश 7-8% की दर से नहीं बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। युवा स्टार्टअप के जरिए रोजगार देने वाले बन रहे हैं। पूरे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है। लोगों की जिंदगी बेहतर हो रही है।”
कांग्रेस ने क्या चिंताएं जताई थीं?
इससे पहले, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक पोस्ट में कहा था कि यह समझौता किसी भी भागीदार को दी गई सबसे बड़ी व्यापारिक छूट है। उन्होंने EU के ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (CBAM) पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।
रमेश ने कहा था कि मोदी सरकार भारत के एल्युमीनियम और स्टील निर्माताओं को CBAM से छूट दिलाने में विफल रही है, जिससे निर्यात पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि EU को भारत का एल्युमीनियम और स्टील निर्यात पहले ही 7 बिलियन डॉलर से घटकर 5 बिलियन डॉलर रह गया है और 1 जनवरी 2026 से इसमें और गिरावट आ सकती है। उन्होंने गैर-टैरिफ बाधाओं और सर्विस सेक्टर में EU की पहुंच को लेकर भी चिंता जताई थी।





