
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवा ध्वज फहराया, धर्म ध्वजा के आरोहण के साथ ही राम मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का प्रक्रिया पूरी हो गई, यह क्षण न केवल मंदिर निर्माण की प्रगति का प्रतीक है, बल्कि उन लाखों भक्तों की आस्था और वर्षों के संघर्ष का भी द्योतक है जिन्होंने इस दिन की कल्पना की थी।
मंदिर परिसर में, एक विशेष रूप से तैयार किए गए स्थान पर, वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच, पवित्र ध्वज को पूरे विधि-विधान के साथ फहराया गया। भक्ति की भावना से परिपूर्ण इस कार्यक्रम को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु सनातनी मंदिर परिसर में उअपस्थित थे मोदी ने बटन दबाकर ध्वज का आरोहण प्रारंभ किया और उसे तब तक निहारते रहे जब तक वो शिखर पर जाकर स्थापित नहीं हो गया। इस पूरी प्रक्रिया में 4 मिनट लगे, शिखर पर स्थापित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुष्प वर्षा कर ध्वज को प्रणाम किया ।
कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य कई गणमान्यजन मौजूद थे, ध्वजारोहण के बाद कार्यक्रम की संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने रामायण की कुछ चौपाइयों को सुनाते हुए कार्यक्रम में पधारे संत जनों और अन्य सभी लोगों का अभिनंद किया, उन्होंने कहा ये ध्वजारोहण एक यज्ञ की पूर्णाहुति नहीं बल्कि एक नए युग का शुभारंभ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 25 नवंबर को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर पहुंचे। यह यात्रा देश के सामाजिक-सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दौरान प्रधानमंत्री मंदिर के शिखर पर विधि-विधान से ध्वजारोहण किया।
प्रधानमंत्री का यह दौरा मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हो रहा है। यह दिन श्री राम और माता सीता के विवाह पंचमी के अभिजीत मुहूर्त के साथ मेल खाता है, जो एक दिव्य संयोग का प्रतीक है। इस दिन की ऐतिहासिक महत्ता इसलिए भी है क्योंकि यह नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस भी है, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में अयोध्या में 48 घंटे तक निर्बाध ध्यान किया था।
प्रधानमंत्री का विस्तृत कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी का अयोध्या दौरा सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ। सबसे पहले वे सप्तमंदिर गए, जिसमें महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी से संबंधित मंदिर हैं। इसके बाद वे शेषावतार मंदिर के दर्शन किये। सुबह लगभग 11 बजे प्रधानमंत्री माता अन्नपूर्णा मंदिर गए। इसके बाद, वे राम दरबार गर्भ गृह में दर्शन और पूजा की और फिर राम लला गर्भ गृह में दर्शन किये।
ध्वज और मंदिर की वास्तुकला
शिखर पर फहराया जाने वाला यह समकोणीय त्रिकोणीय (right triangle) ध्वज 10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा है। इस पर भगवान श्री राम की प्रतिभा और वीरता का प्रतीक एक दीप्तिमान सूर्य का चित्र है, साथ ही ‘ओम’ और कोविदार वृक्ष का चित्र भी अंकित है। यह पवित्र भगवा ध्वज राम राज्य के आदर्शों को समाहित करते हुए गरिमा, एकता और सांस्कृतिक निरंतरता का संदेश देगा।
मंदिर का शिखर पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर स्थापत्य शैली में बनाया गया है, जबकि मंदिर के चारों ओर बना 800 मीटर का परकोटा (परिक्रमा पथ) दक्षिण भारतीय स्थापत्य परंपरा में डिजाइन किया गया है, जो मंदिर की वास्तुशिल्प विविधता को दर्शाता है।
मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर की बाहरी दीवारों पर वाल्मीकि रामायण पर आधारित भगवान श्री राम के जीवन के 87 जटिल नक्काशीदार पत्थर के प्रसंग हैं। इसके अलावा, परकोटे की दीवारों पर भारतीय संस्कृति के 79 कांस्य-निर्मित प्रसंग लगाए गए हैं, जो आगंतुकों को एक सार्थक और शैक्षिक अनुभव प्रदान करते हैं।
कंटेंट राइटर

