कल सुबह 10 बजे देश को संबोधित करेंगे PM मोदी, लॉकडाउन बढ़ने की संभावना

कल सुबह 10 बजे देश को संबोधित करेंगे PM मोदी, लॉकडाउन बढ़ने की संभावना

नई दिल्ली| कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 21 दिन के लॉकडाउन का लागू किया था, जिसकी मियाद 14 अप्रैल को ख़त्म हो रही है| ऐसे में हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि क्या लॉक डाउन आगे बढ़ेगा, अगर अगर आगे बढ़ता है तो इस बार कितने दिनों का लॉक डाउन होगा, क्या रियायत मिलेगी| इन सभी सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार सुबह दस बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान पीएम मोदी लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान करेंगे।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी है कि पीएम मोदी 14 अप्रैल, मंगलवार सुबह 10 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। देश भर की नजर प्रधानमंत्री के सम्बोधन पर होगी| ये चौथी बार होगा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना वायरस के मसले पर देश से सीधे संवाद करेंगे. इससे पहले उन्होंने जनता कर्फ्यू, 21 दिनों के लॉकडाउन और फिर दीया जलाने की अपील के वक्त राष्ट्र को संबोधित किया था|

देश में अधिकतर राज्य वर्तमान स्तिथि को देखते हुए लॉक डाउन आगे बढ़ाने के पक्ष में है| महाराष्ट्र, पंजाब, ओडिशा और पश्चिम बंगाल अपने स्तर पर यह फैसला भी ले चुके हैं। वैसे माना जा रहा है कि इस बार जरूरी चीजों के लिए छूट दी जा सकती है। देश में लागू लॉकडाउन के बावजूद कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं| मरीजों का ताजा आंकड़ा 9000 पार हो गया है, वहीं मृतकों की संख्या 300 पार पहुंच चुकी है। जिसको देखते हुए राज्यों की सरकारों ने इससे निपटने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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