नई दिल्ली: भारत और इजरायल ने अपनी दोस्ती को एक नया आयाम देते हुए द्विपक्षीय संबंधों को ‘स्पेशल स्ट्रैटजिक साझेदारी’ के स्तर तक पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक इजरायल दौरे पर दोनों देशों ने आतंकवाद से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक, कई अहम समझौतों पर मुहर लगाई। इस दौरे का मकसद पिछले एक दशक में हुई प्रगति को आगे बढ़ाना और भविष्य की साझेदारी के लिए एक मजबूत नींव तैयार करना है।
प्रधानमंत्री मोदी और उनके इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू ने एक संयुक्त बयान में इन समझौतों की घोषणा की। इस दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
“हम कंधे से कंधा मिलाकर आतंकवाद और उसके सहयोगियों का विरोध करते रहे हैं और करते रहेंगे।”- संयुक्त बयान
यह प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल का दूसरा दौरा है। विदेश सचिव विक्रम मिश्री के अनुसार, लगभग 9 साल पहले हुए उनके पहले दौरे के बाद से यह यात्रा भारत-इजरायल संबंधों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह दौरा इस महत्वपूर्ण साझेदारी के अगले चरण के लिए मंच तैयार करता है।
AI से लेकर कृषि तक, इन क्षेत्रों में बनी सहमति
इस दौरे में सबसे ज्यादा जोर प्रौद्योगिकी, नवाचार और रक्षा सहयोग पर रहा। दोनों देशों के बीच जिन प्रमुख क्षेत्रों में समझौते हुए उनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल, साइबर सुरक्षा, शिक्षा और कृषि शामिल हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
समझौतों के तहत भारत के यूपीआई (UPI) सिस्टम को इजरायल के मासाव से जोड़ने, साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) के बीच सहयोग पर भी सहमति बनी है।
संयुक्त विकास और उत्पादन पर जोर
रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत और इजरायल अब संयुक्त उत्पादन (Joint Production) और संयुक्त विकास (Joint Development) की दिशा में काम करेंगे। इसके अलावा, भारत में चल रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की संख्या को बढ़ाकर 100 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इन केंद्रों का फोकस कृषि, मत्स्य पालन और जलीय कृषि जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देना है।
समझौतों में वाणिज्य, सेवाओं, विनिर्माण और रेस्तरां क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना भी शामिल है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी। साथ ही, भारत ने गाजा शांति योजना को अपना पूरा समर्थन देने की भी बात कही है।





