
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना पर एक लेख साझा किया, जिसमें इस परियोजना के रणनीतिक और राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित किया गया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री और हवाई संपर्क का एक प्रमुख केंद्र बनाएगी। यह लेख पीएमओ इंडिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया, जिसमें केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस परियोजना को अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बीच संतुलन का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने लेख में कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना में एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (14.2 मिलियन टीईयू क्षमता), एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 450 एमवीए गैस और सौर-आधारित पावर प्लांट, और 16,610 हेक्टेयर में एक टाउनशिप का विकास शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह परियोजना द्वीप के आदिवासी समुदायों, प्रजातियों या पर्यावरणीय संवेदनशीलता के लिए कोई खतरा नहीं है।
पारिस्थितिक संतुलन के लिए बड़ा खतरा
कांग्रेस ने इस परियोजना की आलोचना करते हुए इसे क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन के लिए बड़ा खतरा बताया है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने हाल ही में एक लेख में चिंता जताई कि यह 72,000 करोड़ रुपये की परियोजना विश्व के अद्वितीय वनस्पति और जीव-जंतु पारिस्थितिकी तंत्र को खतरे में डाल सकती है और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने इसे आदिवासी समुदायों के लिए अस्तित्व का खतरा बताया।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच सामंजस्य
प्रधानमंत्री और भूपेंद्र यादव ने इस परियोजना को रणनीतिक, रक्षा और राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए कहा कि यह पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच सामंजस्य स्थापित करने का एक प्रयास है। यादव ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना को पारिस्थितिक, सामाजिक और रणनीतिक पहलुओं पर विचार करने के बाद मंजूरी दी गई है, और यह ग्रेट निकोबार को हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।
