प्रधानमंत्री मोदी रात 8.30 बजे देश को करेंगे संबोधित, महिला आरक्षण मुद्दे पर कर सकते हैं बात

महिला आरक्षण मुद्दे को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे देश देश की जनता को संबोधित करेंगे। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि विपक्ष के द्वारा इस बिल को पास ना होने देने पर पीएम मोदी कांग्रेस को घेर सकते हैं और इसी विषय से संबंधित अन्य मुद्दों पर अपनी बात रख सकते हैं।
PM Modi

लोकसभा में शुक्रवार को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। जिसके बाद देश का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। एक तरफ जहां इस बिल के गिरने के बाद विपक्ष पर हमला बोल रहा है तो वहीं विपक्षी दल खासकर कांग्रेस पलटवार करते हुए भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगा रही है। कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि इस मुद्दे पर उसका रुख हमेशा साफ और एक जैसा रहा है, जबकि भाजपा सरकार लगातार अपना रुख बदलती रही है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा कि विपक्ष को सिर्फ़ 2029 के लोकसभा चुनाव में ही नहीं, बल्कि हर लेवल पर, हर चुनाव में और हर जगह ‘महिलाओं के गुस्से’ का सामना करना पड़ेगा।

बता दें कि महिला आरक्षण मुद्दे पर मचे सियासी घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानि 18 अप्रैल 2026 रात 8:30 बजे देश की जनता को संबोधित करेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने संबोधन में महिला आरक्षण बिल और दो दिन चली संसद में चर्चा के बारे में बात कर सकते हैं। हालांकि वो इसी मुद्दे पर बात करेंगे इसको लेकर कुछ खुलकर जानकारी नहीं हैं।

कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों के खिलाफ जताई नाराजगी

बता दें कि आज केंद्रीय कैबिनेट में भी महिला आरक्षण बिल मुद्दे पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में पीएम मोदी ने विपक्षी दलों के प्रति नाराजगी जताई। पीएम मोदी ने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण देने वाले बिल को गिराकर विपक्ष ने बहुत बड़ी गलती की है। पीएम मोदी ने कहा, देश की महिलाएं उनको माफ नहीं करेगी। विपक्ष को इस गलती के लिए महिलाओं के सवालों का जवाब देना होगा।

महिला आरक्षण बिल पर संसद में हुए मतदान की स्थिति

बता दें कि महिला आरक्षण से जुड़े बिलों को पास कराने के लिए सरकार को संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों से बिल को सर्मथन देने की अपील भी की थी। जब वोटिंग हुई तो परिणाम बिल के पक्ष में नहीं रहे। मतदान के दौरान 298 सदस्यों ने इसके समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 के मतों की आवश्यकता थी। जो सरकार नहीं जुटा पाई और इस तरह यह बिल लोकसभा में गिर गया।

Shyam Dwivedi
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7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

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