राघव चड्ढा ने डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल के साथ जताई एकजुटता, कहा “बिलियन डॉलर कंपनियों की नींव हैं गिग वर्कर्स, उन्हें न्याय मिलना चाहिए”

उन्होंने कहा कि स्विगी, जोमैटो, ज़ेप्टो, ब्लिंकिट जैसी इंस्टा-कॉमर्स कंपनियों को समझना चाहिए कि उनके बिलियन डॉलर एंटरप्राइज़ गिग वर्कर्स की मेहनत से खड़े हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए। राज्यसभा सांसद ने कहा कि ये लोग एक दिन की हड़ताल कर अपनी समस्याएं बता रहे हैं और हम सबको समझना होगा कि ये न तो रोबोट हैं न ही बंधुआ मज़दूर हैं।
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फाइल फोटो

आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने डिलीवरी वर्कर्स की हड़ताल को लेकर एकजुटता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ये सारे वर्कर अपने लिए न्याय की मांग के साथ हड़ताल कर रहे हैं और वो उनका समर्थन करते हैं। इसी के साथ उन्होंने स्विगी, जोमेटो, ज़ेप्टो, ब्लिंकिट जैसी तमाम इंस्टा कॉमर्स एप और कंपनियों से अपील की है कि उनके बिलियन डॉलर एंटरप्राइज़ बनने के पीछे इन गिग वर्कर्स कीकड़ी मेहनत हैं और उन्हें इनका पूरा ध्यान रखना चाहिए।

बता दें कि राघव चड्ढा ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान गिग वर्कर्स की समस्या संसद में उठाया था। दरअसल एक डिलीवरी पार्टनर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने बताया कि लगभग 15 घंटे काम करने के बावजूद उनकी कमाई सिर्फ 763 हुई। इसके बाद आप सांसद ने उन्हें अपने घर लंच पर बुलाया और फिर इस मुद्दे को राज्यसभा में भी उठाया।

नए साल से पहले हड़ताल पर डिलीवरी पार्टनर्स

न्यू ईयर ईव पर शायद आप अपने मनपसंद रेस्तरां से खाना ऑर्डर न कर पाएं। वजह है लाखों डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल। ज़ोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, ज़ेप्टो, सहित कई प्रमुख कंपनियों के लिए काम करने वाले ये वर्कर्स कम वेतन, असुरक्षित कामकाजी स्थितियों और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसे मुद्दों को लेकर बुधवार को हड़ताल पर है। ये हड़ताल आपके न्यू ईयर सेलिब्रेशन्स को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन अगर ऐसा होता है तो अपनी इस छोटी सी परेशानी के साथ इन डिलीवरी पार्टनर्स की इतनी सारी परेशानियों को समझने की कोशिश करना एक अच्छी पहल होगी। यह हड़ताल गिग इकोनॉमी की अस्थिरता पर सवाल उठाती है, जहां सुविधा की कीमत इंसानी जान की जोखिम पर चुकाई जा रही है।

राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स का समर्थन किया

गिग वर्कर्स की हड़ताल के बीच आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने डिलीवरी पार्टनर्स के साथ एकजुटता दिखाई है। एएनआई के साथ बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमें समझना होगा कि ये रोबोट या बंधुआ मज़दूर नहीं हैं। इनके साथ ज्यादती हो रही है। ये मजबूर हैं एक दिन की हड़ताल कर अपनी समस्याएं ज़ाहिर करने के लिए। इन्हें सोशल सिक्योरिटी नहीं मिलती, इन्हें कोई रिटायरमेंट लाभ नहीं मिलता, कोई स्थायी नौकरी नहीं मिलती और अगर ये अव्यवस्थाओं को लेकर किसी तरह का विरोध जताते हैं तो उन्हें एप से लॉग आउट कर दिया जाता है। इन्हें परेशान करने के लिए कई तरह के तरीके अपनाएं जाते हैं। राघव चड्ढा ने कहा कि आज हम उनकी बात सुनें और सारी कंपनियां इनकी बेहतरी के लिए निर्णय लें। उन्होंने कहा कि मैं तमाम कंपनियों के मैनेजमेंट से अपील करता हूं कि वो उनकी ओर देखें, उनकी समस्याओं को सुनें और समाधान करने करें।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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