“ये नाकामी के सबूत हैं..” देश चलाना अब प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं रही, PM मोदी की अपील पर राहुल गांधी का तीखा हमला

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पश्चिम एशिया संकट और घरेलू आर्थिक मोर्चे पर दिए गए सात 'त्याग' उपदेशों पर राहुल गांधी ने तीखा हमला बोला, इसे सरकार की नाकामी का सबूत बताया।
Rahul Gandhi-PM Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम एशिया संकट और घरेलू आर्थिक मोर्चे पर जनता से किए गए ‘त्याग’ के सात आह्वान पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को तीखा पलटवार करते हुए इसे सीधे तौर पर सरकार की ‘नाकामी का सबूत’ करार दिया है। राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, जहां विपक्ष लगातार सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाता रहा है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को ‘समझौता करने वाला’ प्रधानमंत्री बताते हुए उनकी अपील को महज उपदेश नहीं, बल्कि विफलताओं का पुलिंदा बताया। उन्होंने तल्ख लहजे में लिखा, “मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे- सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।” राहुल ने इसे सीधे तौर पर स्वीकार किया कि ये बातें सिर्फ उपदेश नहीं हैं, बल्कि यह देश को उस मुकाम पर लाने की सरकार की नाकामी का स्पष्ट प्रमाण है जहां जनता को अब यह बताया जा रहा है कि उसे क्या खरीदना चाहिए, क्या नहीं, और कहां जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि जब भी कोई मुश्किल आती है, तो प्रधानमंत्री हमेशा जिम्मेदारी जनता के कंधों पर डाल देते हैं, ताकि खुद की जवाबदेही से बच निकलें। राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में जोर देकर कहा कि देश चलाना अब ‘समझौता करने वाले प्रधानमंत्री’ के बस की बात नहीं रही। यह टिप्पणी प्रधानमंत्री के उन बयानों पर आई है, जिनमें उन्होंने देश को आर्थिक मोर्चे पर आत्मनिर्भर बनाने के लिए जनता से कुछ बलिदानों का आह्वान किया था।

पीएम मोदी ने रविवार को देशवासियों से की थी ये अपील

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश को आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने जनता से सात क्षेत्रों में ‘त्याग’ करने का आह्वान किया था, जिसे उन्होंने राष्ट्रभक्ति का नया रूप बताया था।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से खाने के तेल के आयात पर देश की भारी निर्भरता का जिक्र किया। उन्होंने हर परिवार से खाने के तेल का इस्तेमाल कम करने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की अपील की, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत हो सके और पर्यावरण की भी रक्षा हो। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि खाने के तेल की खपत कम करने से न केवल लोगों की सेहत बेहतर होगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। प्रधानमंत्री ने इसे देशभक्ति में एक बड़ा योगदान बताते हुए कहा कि इससे देश के खजाने की सेहत भी सुधरेगी और परिवार के हर सदस्य की सेहत भी बेहतर होगी।

इसी तरह, रासायनिक खाद के आयात पर पड़ने वाले दबाव का भी उन्होंने उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत बड़ी मात्रा में विदेश से रासायनिक खाद खरीदता है। उन्होंने किसानों से इसके उपयोग को आधा करने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आग्रह किया, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो और हमारी जमीन तथा धरती माता भी सुरक्षित रहें।

प्रधानमंत्री मोदी की नई देशभक्ति की परिभाषा

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान देशभक्ति की एक नई परिभाषा भी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि देशभक्ति सिर्फ सीमा पर जान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि आज के समय में इसका मतलब जिम्मेदारी से जीवन जीना और रोजमर्रा की जिंदगी में देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना है। उन्होंने हर भारतीय से आर्थिक मजबूती के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने पर भी प्रधानमंत्री ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हों, वहां उनका इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर कार पूलिंग करने, सामान की ढुलाई के लिए रेलवे का अधिक उपयोग करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की भी उन्होंने अपील की।

Banshika Sharma
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मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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