भारत को युद्ध जैसी स्थिति के लिए रहना चाहिए तैयार, राजनाथ सिंह का बड़ा बयान; किस ओर इशारा

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने और घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए समान अवसर प्रदान कर रही है।
भारत को युद्ध जैसी स्थिति के लिए रहना चाहिए तैयार, राजनाथ सिंह का बड़ा बयान; किस ओर इशारा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि मई में पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष के मद्देनजर भारत को युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। साथ ही, वैश्विक व्यवस्था के कमजोर होने के कारण अपनी सुरक्षा और रणनीति को पुनर्परिभाषित करना चाहिए। सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समकालीन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सभी क्षेत्रों में गहन मूल्यांकन की जरूरत है और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए नवाचार पर ध्यान देना होगा।

राजनाथ सिंह ने मई में चार दिन के संघर्ष के दौरान भारत की कड़ी प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक केस स्टडी के रूप में काम करना चाहिए, जिससे भविष्य की दिशा तय की जा सके। उन्होंने कहा, “यह घटना दर्शाती है कि हमारी सीमाओं पर कहीं भी, कभी भी कुछ भी हो सकता है। हमें युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार रहना होगा और हमारी तैयारियों का आधार हमारी अपनी नींव पर टिका होना चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वदेशी सैन्य उपकरणों, जैसे आकाश मिसाइल, ब्रह्मोस क्रूज और आकाशतीर वायु रक्षा नियंत्रण प्रणाली, ने ऑपरेशन सिंदूर में भारत की क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को मजबूत किया।

रक्षा उत्पादन कितना बढ़ा 

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने और घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए समान अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर था, लेकिन अब रक्षा उत्पादन ₹46,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.51 लाख करोड़ हो गया है, जिसमें निजी क्षेत्र का योगदान ₹33,000 करोड़ है। रक्षा निर्यात भी 10 साल पहले ₹1,000 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹24,000 करोड़ तक पहुंच गया है और मार्च 2026 तक इसके ₹30,000 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।

घरेलू रक्षा विनिर्माण में योगदान

राजनाथ सिंह ने निजी क्षेत्र से घरेलू रक्षा विनिर्माण में योगदान को अगले तीन वर्षों में 25% से बढ़ाकर 50% करने का आह्वान किया। उन्होंने आपूर्ति और रखरखाव श्रृंखलाओं पर ध्यान देने और स्वदेशी उप-प्रणालियों और घटकों के निर्माण पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने क्वांटम मिशन, अटल इनोवेशन मिशन और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन जैसे नवाचार को बढ़ावा देने वाली पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ‘मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड‘ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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