राज्यसभा विदाई सत्र: मल्लिकार्जुन खड़गे ने ली चुटकी “एचडी देवगौड़ा ने मोहब्बत हमारे साथ की, शादी मोदी जी के साथ”, हंस प़ड़े पीएम मोदी, सदन में गूंजे ठहाके

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि 'मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ ही सभी पक्षों की बातों को सुनना और अच्छी बातों को सीखकर व्यवहार में लाने की कोशिश की है। उच्च सदन में मेरा बहुत सारा खट्टा-मीठा अनुभव रहा है।' कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस सदन को और सार्थक बनाने के लिए नए प्रयासों की जरूरत है।
Mallikarjun Kharge

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राज्यसभा में बुधवार को बजट सत्र के दौरान रिटायर हो रहे सांसदों के लिए विशेष विदाई सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित किया। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा, नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह सहित 25 राज्यों के कुल 59 सदस्य अप्रैल से जून के बीच अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। इनमें से 37 सांसदों का कार्यकाल 18 मार्च को समाप्त हो रहा है।

इस अवसर पर राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी संबोधन दिया। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन और संसदीय अनुभवों को साझा करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, सहयोग की राजनीति और संसद की गरिमा पर जोर दिया।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने साझा किए अपने अनुभव

राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण में कहा कि राज्यसभा एक स्थायी सदन है। उन्होंने कहा कि राजनीति में लोग कभी रिटायर नहीं होते और सार्वजनिक जीवन में उनका योगदान जारी रहता है। उन्होंने अपने बारे में कहा कि लंबे राजनीतिक जीवन के बाद पहली बार वे राज्यसभा के सदस्य बने और अब उनका कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। इस दौरान उन्होंने सदन में नियमित उपस्थिति और चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी को अपनी प्राथमिकता बताया।

उन्होंने अपने कार्यकाल को “खट्टा-मीठा अनुभव” बताते हुए कहा कि राज्यसभा को और अधिक सार्थक बनाने के लिए नए प्रयासों की जरूरत है। कांग्रेस सांसद ने सत्ता और विपक्ष के बीच सहयोग की भावना पर जोर देते हुए कहा कि अच्छे कानून बनाने में दोनों की बराबर भूमिका होती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सदन की बैठकों की संख्या बढ़नी चाहिए, ताकि जनता के मुद्दों पर गंभीर और विस्तृत चर्चा हो सके।

देवगौड़ा पर चुटीली टिप्पणी, पीएम मोदी भी हंस पड़े

इस दौरान उन्होंने विभिन्न सांसदों का जिक्र करते हुए उन्होंने कई नेताओं की तारीफ की, लेकिन देवगौड़ा पर उनकी टिप्पणी सबसे यादगार रही।  मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि “एचडी देवगौड़ा जी प्रधानमंत्री समेत कई बड़े पदों पर रहे। मैं उन्हें 54 साल से जानता हूं। मैंने उनके साथ काम किया है। उन्होंने*मोहब्बत हमारे साथ की लेकिन शादी नरेंद्र मोदी के साथ कर ली।” उनकी इस बात पर प्रधानमंत्री मोदी भी हंस पड़े और सदन में ठहाके गूंज उठे। अपने संबोधन में खड़गे ने शरद पवार को राष्ट्रीय नेता बताते हुए उनके अनुभव की सराहना की। उन्होंने दिग्विजय सिंह के योगदान, रामदास आठवले की कविताओं और अन्य सांसदों की सक्रिय भूमिका का भी जिक्र किया।

अच्छे कानून बनाने में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की समान भूमिका

इस अवसर पर उन्होंने संसदीय नियमों की समीक्षा, भाषणों के अंश हटाए जाने के मुद्दे और कमजोर वर्गों, किसानों व मजदूरों से जुड़े विषयों पर अधिक चर्चा की जरूरत भी उठाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि अच्छे कानून बनाने में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की समान भूमिका होती है। इसलिए टकराव के बजाय सहयोग की भावना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमें नफरत की नहीं, सहयोग की भावना से काम करना चाहिए, वरना हमेशा संदेह बना रहेगा। अपने संबोधन के अंत में मल्लिकार्जुन खड़गे ने समय, संस्थाओं और सार्वजनिक जीवन की निरंतरता पर विचार रखते हुए कहा कि चेहरे बदलते रहते हैं, लेकिन संस्थाएं कायम रहती हैं। उन्होंने भाषण में विदाई ले रहे सांसदों को शुभकामनाएं देते हुए लिए एक शेर पढ़ा ““विदाई तो है दस्तूर जमाने का पुराना, पर जहां भी जाना, अपनी छाप कुछ ऐसे छोड़ जाना, कि हर कोई गुनगुनाए तुम्हारा ही तराना।”

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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