राम मंदिर दान चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने SIT में फोरेंसिक ऑडिटर जोड़ने के निर्देश दिए, मांगी स्टेटस रिपोर्ट

राम मंदिर के दान चढ़ावा चोरी की जांच जारी है, अयोध्या पुलिस ने अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जांच टीम ने नकदी, गाड़ियां, निवेश से जुड़े दस्तावेज और अन्य संपत्तियां बरामद की हैं, बताया जा रहा है कि आरोपियों ने इसे गबन किए गए पैसे से ख़रीदा है।
Ram Mandir donation theft case Supreme Court hearing

Ram Mandir donation theft case Supreme Court hearing

अयोध्या के राम मंदिर में मिले दान और चढ़ावे की चोरी के आरोपी अभी जेल में हैं लेकिन मामले की गहरे से जाँच जारी है, उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि नई SIT का गठन कर दिया गया है और इसमें तीन IPS अधिकारी शामिल किये गये हैं, अदलत ने कहा और बेहतर जांच के लिए इस टीम में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने की जरुरत बताई और इसे शामिल करने के निर्देश दिए, शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह एसआईटी जांच की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में जमा करे।

उल्लेखनीय है कि राम मंदिर दान चढ़ाव चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, घटना के तुरंत बाद राज्य सरकार द्वारा गठित की गई एसआईटी पर सवाल उठने के बाद चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने पिछले सप्ताह कहा था कि इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एसआईटी बननी चाहिए, आज सोमवार को सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि अदालत के आदेश के तहत ही नई एसआईटी बनाई गई है इसकी अध्यक्षता लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस को सौंपी गई है, इस टीम में एक डीआईजी और एक एसएसपी भी शामिल हैं।

जांच के लिए फोरेंसिक ऑडिट जरूरी 

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नई एसआईटी की जानकारी मिलने के बाद अदालत ने कहा कि जो दान और चढ़ावा भक्तों ने दिया है उसकी गहराई से जाँच के लिए इस टीम में एक फोरेंसिक औदिटर भी जरूरी है जो वित्तीय गड़बड़ियों की जांच अपनी तरह से करेगा, कोर्ट के इस निर्देश को सॉलिसिटर जनरल ने स्वीकार कर लिया।

दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

बेंच की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस ने कहा, हम मामला बंद नहीं कर रहे हैं, अभी हमारा ध्यान मुख्य रूप से अच्छी जांच पर है बाकी विषयों पर बाद में विचार होगा, हम आगे के लिए सुधार के उपाय पर भी हम चर्चा करेंगे,  कोर्ट ने एसआईटी को अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है, मामले की अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद होगी।

उधर, राम मंदिर के चढ़ावे में कथित तौर पर गबन को लेकर जांच जारी है. अयोध्या पुलिस ने अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच टीम ने नकदी, गाड़ियां, निवेश से जुड़े दस्तावेज और अन्य संपत्तियां बरामद की हैं, जिन्हें कथित तौर पर गबन किए गए फंड से खरीदा गया था.

——-

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए राज्य द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) में एक फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करे। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह एसआईटी जांच की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में जमा करे।

दान में हेराफेरी की जांच सीबीआई से कराने की मांग पर सुनवाई
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें अयोध्या राम मंदिर के लिए मिले दान में हेराफेरी के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच और मंदिर ट्रस्ट के फाइनेंस का ऑडिट कराने की मांग की गई है।

अभी एसआईटी में कौन कौन शामिल हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत से कहा कि लखनऊ के आईजी आईपीएस एस. किरण के नेतृत्व में गठित एसआईटी में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल और एक सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस भी शामिल हैं।

यूपी सरकार ने शीर्ष अदालत का सुझाव माना
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच के उस सुझाव को मान लिया कि एसआईटी में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए। शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में पेश हुए वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा कि एसआईटी को राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर से मिले दान की रसीदों का ऑडिट करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘लोगों ने 500 या 1000 रुपये दिए हैं। लेकिन ऐसी खबरें हैं कि यह पैसा ट्रस्ट तक नहीं पहुंचा है। ट्रस्ट को जो भी मिला है, उसे किसी वेबसाइट पर दिखाया जाना चाहिए ताकि लोगों को पता चल सके कि उनका पैसा कहां जा रहा है।’

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews