आरबीआई गवर्नर को कितनी मिलती है सैलरी? भत्ते-बंगले के अलावा क्या क्या दी जाती हैं सुविधाएं? जानें सब कुछ

आरबीआई के गर्वनर को हर माह 2.5 लाख रुपये सैलरी दी जाती है जो भारत के प्रधानमंत्री की सैलरी से भी ज्यादा है।सैलरी से अलावा भारत सरकार की ओर से उन्हें मुफ्त आवास, गाड़ी, मेडिकल सुविधाएं और पेंशन समेत कई अन्य सुविधांए भी मिलती हैं
RBI Repo Rate

भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है। यह भारत में बैंकिंग प्रणाली व मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने और भारतीय रुपये को जारी करने के साथ-साथ देश की मौद्रिक नीति को निर्धारित करता है। लेकिन क्या आप जानते है भारतीय रिजर्व बैंक गवर्नर को कितनी सैलरी मिलती है। सैलरी के अलावा किन किन भत्तों और सुविधाओं का लाभ दिया जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबकि, आरबीआई के गर्वनर को हर माह 2.5 लाख रुपये सैलरी दी जाती है जो भारत के प्रधानमंत्री की सैलरी से भी ज्यादा है। इसमें महंगाई भत्ता (DA) और अन्य अलाउंसेज को मिलाकर ग्रॉस सैलरी ₹2.87 लाख प्रति माह तक पहुंचती है। यह सैलरी कैबिनेट सचिव के स्तर पर है और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से थोड़ा अधिक है।

सैलरी के अलावा भी मिलते है ये भत्ते-सुविधाएं

  • गवर्नर को सैलरी से अलावा भारत सरकार की ओर से रहने के लिए घर तो साथ ही गाड़ी और एक ड्राइवर, हाउसहेल्प समेच कई अन्य सुविधांए मिलती हैं।
  • गवर्नर को जो घर मिलता है वह मुंबई के पॉश इलाकों में से एक मालाबार हिल्स में मिलता है। बंगले की अनुमानित कीमत 450 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसे भारतीय पोर्ट ट्रस्ट से लीज पर लिया है।
  • गवर्नर और उनके परिवार को मुफ्त मेडिकल सुविधा दी जाती है। कार और ड्राइवर भी सरकार की तरफ से दिए जाते हैं।रिटायर होने के बाद गवर्नर को पेंशन नहीं मिलती, लेकिन मेडिकल और अन्य भत्ते पूरी जिन्दगी मिलते हैं।
  • घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के दौरान उच्च श्रेणी की कैटेगरी में परिवहन सुविधाएं दी जाती है।ये सुविधा केवल सरकारी कार्यों के लिए ही दी जाती है, निजी यात्रा का खर्च उन्हें खुद उठाना पड़ता है।

डिप्टी गवर्नर/एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर को मिलता है इतना वेतन

वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर 1990 बैच के आईएएस संजय मल्होत्रा है। आरबीआई गवर्नर का कार्यकाल 3 साल का होता है।गवर्नर आरबीआई में डिप्टी गवर्नर का भी पद होता है, जिन्हें 2 लाख 25 हजार रुपये की सैलरी मिलती है। वहीं एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर की सैलरी दो लाख सोलह हजार रुपये होती है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्त्रोतो से जुटाई गई है, जिसमें बदलाव हो सकता है।

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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