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सत्ता से नदारत; मंत्रिमंडलों में केवल 10 प्रतिशत मंत्री महिलाएं, राजनीति की चौंकाने वाली रिपोर्ट

Written by:Mini Pandey
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केंद्र और राज्यों के मंत्रिमंडलों में भी असंतुलन स्पष्ट है। पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक आठ महिला मंत्री हैं, जबकि गोवा, हिमाचल प्रदेश, पुडुचेरी और सिक्किम जैसे राज्यों में एक भी महिला मंत्री नहीं है।
सत्ता से नदारत; मंत्रिमंडलों में केवल 10 प्रतिशत मंत्री महिलाएं, राजनीति की चौंकाने वाली रिपोर्ट

भारत में राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी चिंताजनक रूप से कम है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रिमंडलों में केवल 10 प्रतिशत मंत्री महिलाएं हैं। कुल 643 मंत्रियों में से मात्र 63 महिलाएं हैं, जबकि 580 पुरुष हैं। लोकसभा में 75 और राज्यसभा में 42 महिलाएं हैं जो कुल मिलाकर लगभग 15 प्रतिशत है। 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जो संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान करता है, अभी लागू नहीं हुआ है।

राज्य विधानसभाओं में भी स्थिति बेहतर नहीं है। मार्च 2025 के एक रिपोर्ट के अनुसार, देश भर की विधानसभाओं में 4092 विधायकों में से केवल 400 महिलाएं हैं, जो कुल का लगभग 10 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ एकमात्र राज्य है जहां महिला विधायकों की संख्या 20 प्रतिशत से अधिक है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 51 महिला विधायक हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल (44) और बिहार (29) का स्थान है। वहीं, पुडुचेरी और नगालैंड में सबसे कम महिला विधायक हैं, क्रमशः एक और दो।

सबसे अधिक 8 महिला मंत्री किस राज्य में

केंद्र और राज्यों के मंत्रिमंडलों में भी असंतुलन स्पष्ट है। पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक आठ महिला मंत्री हैं, जबकि गोवा, हिमाचल प्रदेश, पुडुचेरी और सिक्किम जैसे राज्यों में एक भी महिला मंत्री नहीं है। दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में केवल एक-एक महिला मंत्री हैं। इसके अलावा, 30 राज्यों में से केवल दो राज्यों (पश्चिम बंगाल और दिल्ली) में महिला मुख्यमंत्री हैं, जो इस क्षेत्र में लैंगिक असमानता को और उजागर करता है।

33 प्रतिशत आरक्षण के लक्ष्य से बहुत दूर

संसद में स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन अभी भी 33 प्रतिशत आरक्षण के लक्ष्य से बहुत दूर है। 2024 के लोकसभा चुनावों में औसतन हर महिला उम्मीदवार को 10 पुरुष उम्मीदवारों से मुकाबला करना पड़ा। 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक भी महिला सांसद नहीं चुनी गई। बिहार में आगामी चुनावों के साथ, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या राजनीतिक दल महिलाओं को 33 प्रतिशत टिकट देने के अपने वादे को पूरा करते हैं या यह केवल दिखावा बनकर रह जाएगा।

Mini Pandey
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