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आरजेडी सांसद मनोज झा ने ओवैसी को दी बिहार चुनाव न लड़ने की सलाह, AIMIM के पत्र का दिया ये जवाब

Written by:Shruty Kushwaha
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एक तरफ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी महागठबंधन के साथ मिलकर बिहार चुनाव लड़ना चाहती है, वहीं मनोज झा उन्हें चुनाव न लड़ने का सुझाव दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी साहब की मंशा बीजेपी की नफरत की राजनीति को शिकस्त देना है तो ये काम वो बिहार चुनाव न लड़कर बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
आरजेडी सांसद मनोज झा ने ओवैसी को दी बिहार चुनाव न लड़ने की सलाह, AIMIM के पत्र का दिया ये जवाब

आरजेडी सांसद मनोज झा ने असदुद्दीन ओवैसी को सलाह दी है कि उनकी पार्टी बिहार चुनाव न लड़ें। AIMIM के बिहार अध्यक्ष द्वारा आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर गठबंधन का हिस्सा बनाने का आग्रह करने के बाद मनोज झा ने ये बात कही है। उन्होंने कहा कि कई बार नफरत की राजनीति को शिकस्त देने के लिए चुनाव न लड़ने का फैसला ज्यादा सही साबित होता है।

बता दें कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन द्वारा राष्ट्रीय जनता दल को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि यदि AIMIM महागठबंधन में शामिल हो जाता है तो इससे सेक्युलर वोटों के विभाजन को रोका जा सकता है, जो सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में आने से रोकने में सहायक होगा।

बिहार चुनाव से पहले AIMIM का आरजेडी को पत्र

बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। AIMIM बिहार प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को पत्र लिखकर महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि AIMIM के महागठबंधन में शामिल होने से सेकुलर वोटों का बिखराव रोका जा सकता है, जिससे सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता में आने से रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा “अगर हम एकजुट होकर लड़ेंगे तो सेकुलर वोटों का बंटवारा नहीं होगा और महागठबंधन की सरकार बनने की संभावना बढ़ेगी।” AIMIM ने पहले भी 2020 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल होने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली थी।

मनोज झा ने ओवैसी को दी सलाह

अब इस पत्र के जवाब में RJD सांसद मनोज झा का बयान सामने आया है। उन्होंने एएनआई के साथ बात करते हुए कहा कि ‘असदुद्दीन ओवैसी का आधार हैदराबाद में है। उन्हें और उनके सलाहकारों को पता है कि अगर वह चुनाव लड़ते हैं या नहीं लड़ते हैं तो क्या होता है या क्या नहीं होता है। अगर वह भाजपा के तानाशाही चरित्र को हराना चाहते हैं, उनकी नफरत की राजनीति को हराना चाहते हैं, तो कई बार चुनाव न लड़ना भी ऐसा ही फैसला होगा। मुझे उम्मीद है कि वह इस बारे में सोचेंगे।’ मनोज झा ने कहा कि अगर उनकी मंशा है कि कई बार चुनाव में ऐसे क्षण आते है कि आपके न लड़ने का फैसला ही सही होता है और इसे समझते हुए मैं आग्रह करूंगा कि ओवैसी साहब इसे समझें क्योंकि ये चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है जो देश की राजनीति का भी निर्धारण करेगा।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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