
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि भारत में इस्लाम का हमेशा स्थान रहेगा और अखंड भारत एक अटल सत्य है। उन्होंने काशी और मथुरा के लिए अयोध्या जैसे आंदोलन की मांगों के बीच स्पष्ट किया कि राम मंदिर ही एकमात्र आंदोलन था, जिसमें आरएसएस शामिल हुआ और उसे अंत तक ले गया। भागवत ने कहा कि काशी, मथुरा और अयोध्या हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हर जगह मंदिर या शिवलिंग खोजने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि हिंदू इन तीन स्थानों के लिए आंदोलन चाहते हैं तो स्वयंसेवक उनके साथ शामिल हो सकते हैं, जो सामाजिक सौहार्द की दिशा में बड़ा कदम होगा।
भागवत ने आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी के बीच मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों संगठन एक-दूसरे को केवल सुझाव देते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह या कोई अन्य व्यक्ति 75 वर्ष की आयु में रिटायर होने की बात नहीं कह रहे हैं, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके खुद के रिटायरमेंट की चर्चाओं पर विराम लग गया। भागवत ने कहा कि आरएसएस स्वदेशी और आत्मनिर्भरता में विश्वास रखता है और सरकार को अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव जैसे मुद्दों पर सलाह देने की बजाय समर्थन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय था, लेकिन उस समय संगठन की सीमित शक्ति के कारण विभाजन का विरोध प्रभावी नहीं हो सका।
जाति व्यवस्था पर क्या बोले
जाति व्यवस्था पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि यह व्यवस्था अब अप्रासंगिक हो चुकी है और इसे समाप्त होना चाहिए। उन्होंने संविधान द्वारा निर्धारित आरक्षण नीतियों का समर्थन करते हुए कहा कि जब तक जरूरत होगी, आरएसएस इसका समर्थन करेगा। भागवत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर भी विचार व्यक्त किए और कहा कि आरएसएस इसके फायदे और नुकसान का अध्ययन कर इसे अपनाने की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने धर्मांतरण और अवैध प्रवास को जनसांख्यिकीय असंतुलन का कारण बताया और कहा कि रोजगार स्थानीय लोगों, जिसमें मुस्लिम भी शामिल हैं, को मिलना चाहिए, न कि अवैध प्रवासियों को।
संगठन बीजेपी के लिए सब कुछ तय नहीं करता
आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि संगठन बीजेपी के लिए सब कुछ तय नहीं करता, जैसा कि आम धारणा है। उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष के चयन में आरएसएस की कोई भूमिका न होने की बात दोहराई और कहा कि दोनों संगठनों के बीच कोई मतभेद नहीं हैं। भागवत ने जोर देकर कहा कि धर्म व्यक्तिगत पसंद का विषय है और इसमें कोई जबरदस्ती या प्रलोभन नहीं होना चाहिए। उन्होंने अवैध प्रवास को रोकने के लिए सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए समाज से भी इसमें योगदान देने की अपील की।
