आरएसएस क्यों नहीं चाहता कि जापान जैसा बने भारत? मोहन भागवत दे रहे चेतावनी

Mohan Bhagwat

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को जापान जैसे जनसंख्या संकट से बचाने की चेतावनी दी है। जापान तकनीकी रूप से दुनिया के सबसे उन्नत देशों में से एक है। यह पिछले साल लगभग 10 लाख लोगों की जनसंख्या में कमी के साथ गंभीर संकट का सामना कर रहा है। भागवत ने भारतीय परिवारों से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील की है, ताकि देश की जनसांख्यिकीय ताकत बनी रहे और धीमी विलुप्ति से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि उचित उम्र में शादी और तीन बच्चों का पालन-पोषण माता-पिता और बच्चों दोनों के लिए फायदेमंद है।

जापान की समस्या केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। वहां की प्रजनन दर 1.20 है, जो जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए आवश्यक 2.1 के स्तर से काफी कम है। लगभग 30% आबादी 65 वर्ष से अधिक उम्र की है और यदि यही रुझान जारी रहा, तो 2056 तक जापान की आबादी 12.8 करोड़ से घटकर 10 करोड़ से नीचे जा सकती है। ग्रामीण क्षेत्र खाली हो रहे हैं, श्रम की कमी हो रही है और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियां दबाव में हैं। भागवत ने चेतावनी दी कि भारत, खासकर दक्षिणी राज्यों में, जहां प्रजनन दर पहले ही प्रतिस्थापन स्तर से नीचे जा चुकी है, को भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

शिक्षा और करियर में अधिक अवसर

जापान में यह संकट दशकों से बन रहा है। महिलाओं को शिक्षा और करियर में अधिक अवसर मिले, लेकिन कामकाजी संस्कृति और पारंपरिक मातृत्व की अपेक्षाएं उनके लिए परिवार शुरू करना कठिन बना रही हैं। पुरुषों के लिए भी आर्थिक अनिश्चितता और शहरों में रहने की उच्च लागत ने परिवार शुरू करने को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। भारत में भी खासकर दक्षिणी राज्यों में प्रजनन दर में कमी चिंता का विषय बन रही है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी जापान की गलती दोहराने के खिलाफ चेतावनी दी है।

जनसंख्या संकट अचानक नहीं आता

मोहन भागवत और अन्य नेताओं का मानना है कि जनसंख्या संकट अचानक नहीं आता, बल्कि यह सामाजिक अपेक्षाओं, आर्थिक असुरक्षा और आकांक्षाओं के बीच की खाई से धीरे-धीरे बनता है। जापान ने नए माता-पिता के लिए नकद सहायता, सब्सिडी वाली डे-केयर और माता-पिता की छुट्टी जैसे उपाय किए हैं, लेकिन गहरी सामाजिक और कार्यस्थल संबंधी बाधाएं बरकरार हैं। भारत के लिए सबक साफ है: अपनी युवा और विशाल जनसंख्या का लाभ उठाने से पहले ही इसे खोने का जोखिम नहीं लिया जा सकता।

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