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सबरीमाला अयप्पा मंदिर के कपाट बंद हुए, मंडल-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा संपन्न, जानिए अब कब खुलेंगे द्वार

Written by:Shruty Kushwaha
Published:
सबरीमाला श्री अयप्पा मंदिर में वार्षिक मंडल-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा सत्र का समापन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हो गया है और मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। इस तीर्थयात्रा को विश्व की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में गिना जाता है, जिसमें श्रद्धालु अनुशासन, समानता और आत्मसंयम के सिद्धांतों का पालन करते हैं।
सबरीमाला अयप्पा मंदिर के कपाट बंद हुए, मंडल-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा संपन्न, जानिए अब कब खुलेंगे द्वार

Sabarimala Ayyappa Temple

केरल में सबरीमाला श्री अयप्पा मंदिर के कपाट आज पारंपरिक विधिविधान के साथ बंद कर दिए गए। यह समापन दो महीने से अधिक समय तक चले मंडल-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा महोत्सव के  बाद हुआ। इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान अयप्पा के दर्शन किए।

बता दें कि मंडल-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा के दौरान हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से सबरीमाला पहुंचते हैं। इस अवधि में मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और यातायात प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की जाती है। मंदिर का प्रबंधन त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड द्वारा किया जाता है, जो राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से यात्रा संचालन की जिम्मेदारी निभाता है।

सबरीमाला अयप्पा मंदिर के कपाट बंद किए गए

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अयप्पा मंदिर में सात दिवसीय मंडल-मकरविलक्कु महोत्सव के समापन पर पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। निर्धारित परंपरा के अनुसार अंतिम दिन प्रातः विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए गए। इसके बाद मंगलवार सुबह लगभग 6:45 बजे त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की देखरेख में गर्भगृह के कपाट बंद किए गए। इस दौरान भक्तों ने भावुक होकर भगवान अय्यप्पा का जयकारा लगाया और विदाई दी।

अब अगले माह खुलेंगे द्वार

इस पूरे सीजन में करोड़ों भक्तों ने 41 दिनों का कठोर व्रत रखा, जिसमें शाकाहारी भोजन, ब्रह्मचर्य, काले वस्त्र धारण करना और “स्वामीये शरणम अय्यप्पा” का निरंतर जाप शामिल था। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार, मंदिर अब अगले माह 12 फरवरी  को शाम 5 बजे कुंभम मास की मासिक पूजा के लिए फिर से खोला जाएगा। यह पूजा 17 फरवरी तक चलेगी। इस दौरान भक्त दर्शन कर सकेंगे और विशेष अनुष्ठानों में भाग ले सकेंगे।

सबरीमाला मंदिर की विशेषताएं

सबरीमाला मंदिर केरल के पथानमथिट्टा जिले में पेरियार टाइगर रिजर्व के घने जंगलों में लगभग 914 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह भगवान अय्यप्पा को समर्पित है, जो भगवान विष्णु और शिव के पुत्र माने जाते हैं। श्री अयप्पा मंदिर की कई अनोखी परंपराएं और विशेषताएं इसे भारत के सबसे प्रतिष्ठित तीर्थस्थलों में से एक बनाती हैं। ये मंदिर सामान्य देवस्थलों की तरह सालभर नहीं खुलता है बल्कि सिर्फ मासिक पूजाओं (प्रत्येक मलयालम मास में 5-6 दिन), मंडल-मकरविलक्कु, विषु, ओणम और अन्य विशेष अवसरों पर खोला जाता है। इस दौरान हर रात मंदिर बंद होने से पहले 16 पदों वाला हरिवरासनम गीत गाया जाता है, जो भगवान अयप्पा को लोरी की तरह सुनाया जाता है।

सबरीमाला मंदिर में जाति, वर्ग या पद की कोई ऊंच-नीच नहीं होती। यहां पदानुक्रम इस बात पर आधारित होता है कि किसने कितनी बार तीर्थयात्रा की है। सभी भक्त काले या नीले वस्त्र धारण करते हैं, जो समानता का प्रतीक है। सबरीमाला मंदिर 18 पहाड़ियों से घिरा है, जो हिंदू धर्म के 18 पुराणों का प्रतीक माने जाते हैं। यह स्थान रामायण काल से जुड़ा है, जहां शबरी नामक तपस्विनी रहती थीं, जिन्होंने भगवान राम की प्रतीक्षा की थी। इस मंदिर का नाम भी इन्हीं से नाम पर आधारित है।