पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल अब खुलकर टकराव की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। दक्षिण 24 परगना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने BJP की परिवर्तन यात्रा की शुरुआत की, और कुछ ही घंटों बाद कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जवाबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में BJP के साथ चुनाव आयोग को भी निशाने पर ले लिया। एक तरफ बदलाव का दावा, दूसरी तरफ मतदाता अधिकारों पर सवाल चुनाव से पहले यही नई बहस बन गई है।
अमित शाह ने अपनी रैली में तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाया और कहा कि इस बार चुनाव में TMC की विदाई तय है। BJP नेताओं ने परिवर्तन यात्रा को राजनीतिक बदलाव का अभियान बताया। मंच से राज्य सरकार को कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर भी घेरा गया। रैली में BJP अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इसी रुख को दोहराया।
“इस बार चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की विदाई तय है।”- अमित शाह
मतदाता सूची पर सीधा राजनीतिक संघर्ष
कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का फोकस अलग था। उन्होंने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए गए हैं। उनका कहना रहा कि यह कार्रवाई BJP को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए की गई। ममता बनर्जी ने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया।
यह बयान सिर्फ सामान्य विरोध तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर मतदाता सूची में गलत तरीके से बदलाव होंगे, तो इसका असर सीधे चुनाव की विश्वसनीयता पर पड़ेगा। उनके बयान के बाद विवाद चुनावी भाषणबाजी से निकलकर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता के सवाल तक पहुंच गया है।
भवानीपुर का उदाहरण और राजनीतिक संदेश
ममता बनर्जी ने अपने ही भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बावजूद जनता का समर्थन उनके साथ है। उनका बयान राजनीतिक रूप से आत्मविश्वास दिखाने वाला था, लेकिन उसके केंद्र में मतदाता सूची पर आपत्ति ही रही।
“अगर एक भी वोटर बचा रहेगा, तो भी मैं चुनाव जीत जाऊंगी।”- ममता बनर्जी
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने BJP की परिवर्तन यात्रा पर भी निशाना साधा और कहा कि यह बंगाल में पार्टी की आखिरी राजनीतिक यात्रा साबित होगी। यानी जवाब केवल प्रशासनिक आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनावी परिणामों पर सीधा दावा भी साथ में रखा गया।
लाखों नाम हटने के दावे से बढ़ा विवाद
राज्य में चल रहे विशेष पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जाने की बात सामने आई है, और बड़ी संख्या में मतदाताओं की पात्रता जांच भी जारी है। यही वह बिंदु है जहां से विवाद और गहरा हुआ है। BJP इस प्रक्रिया को चुनाव व्यवस्था की सफाई और सूची को अपडेट करने की जरूरत बता रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश का हिस्सा कह रही है।
मतदाता सूची का मुद्दा बंगाल की राजनीति में नया नहीं है, लेकिन इस बार इसकी तीव्रता ज्यादा है क्योंकि चुनाव नजदीक हैं और दोनों प्रमुख पक्ष इसे अपने-अपने राजनीतिक नैरेटिव के केंद्र में रख चुके हैं। BJP परिवर्तन यात्रा को जनसमर्थन का संकेत बता रही है। दूसरी तरफ TMC यह संदेश दे रही है कि असली मुकाबला सिर्फ दलों के बीच नहीं, बल्कि मतदाता पहचान और अधिकार के सवाल पर भी है।
चुनावी राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप आम बात माने जाते हैं, लेकिन जब विवाद चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची पर केंद्रित हो जाए, तो उसका असर व्यापक होता है। अभी स्थिति यही है: BJP और TMC दोनों अपनी-अपनी लाइन पर कायम हैं, और चुनाव से पहले बंगाल की सियासत में तापमान और बढ़ने के संकेत साफ हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की पूरी संभावना है।






