सबरीमाला मंदिर सोना चोरी: ISRO की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, कपाट नहीं, सिर्फ सोने की परत उतारी गई

केरल के सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी मामले में ISRO के वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर के गर्भगृह के दरवाजे नहीं बदले गए, बल्कि तांबे की शीट पर चढ़ी सोने की परत को चालाकी से निकाल लिया गया।
सबरीमाला मंदिर सोना चोरी: ISRO की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, कपाट नहीं, सिर्फ सोने की परत उतारी गई

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से सोना चोरी के मामले में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की जांच रिपोर्ट ने एक बड़ा खुलासा किया है। विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के वैज्ञानिकों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि मंदिर के गर्भगृह के दरवाजे बदले नहीं गए थे, बल्कि उन पर चढ़ी सोने की परत को बेहद चालाकी से उतार लिया गया था।

यह रिपोर्ट स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंपी गई है, जिसे बुधवार (28 जनवरी, 2026) को केरल हाईकोर्ट के समक्ष पेश किया गया। इस रिपोर्ट ने उन सभी अटकलों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि मंदिर के पूरे कपाट बदलकर किसी अंतरराष्ट्रीय गिरोह को बेच दिए गए।

ISRO की जांच में क्या सामने आया?

वैज्ञानिकों ने अपनी जांच में पाया कि गर्भगृह के दरवाजे पर लगे पैनल वही मूल तांबे की शीट हैं, जिन्हें बदला नहीं गया है। रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि चोरी हुआ हिस्सा ठोस सोने के पैनल नहीं, बल्कि तांबे की शीट पर चढ़ाई गई सोने की एक परत थी। पहले यह माना जा रहा था कि शायद पूरे पैनल ही सोने के थे।

जांच में यह भी पता चला कि दरवाजे का लकड़ी का फ्रेम, जिसे स्थानीय भाषा में ‘कट्टिल’ कहा जाता है, वह भी असली है और उसे नहीं बदला गया है। हालांकि, जांच के लिए लिए गए सैंपल में सोने की मात्रा काफी कम पाई गई, जिससे यह साबित होता है कि सोने की परत को निकाल लिया गया था, जबकि तांबे की शीट जस की तस रही।

पैनल पर क्यों दिखे बदलाव के निशान?

रिपोर्ट में पैनल पर दिखाई दे रहे बदलावों की वजह भी बताई गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये बदलाव किसी नई शीट को लगाने से नहीं, बल्कि एक केमिकल रिएक्शन के कारण हुए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोना निकालने के लिए पारे (mercury) और अन्य रासायनिक घोलों का इस्तेमाल किया गया होगा, जिसके कारण तांबे की शीट की रासायनिक बनावट में बदलाव आ गया और उसकी सतह अलग दिखने लगी।

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि असली चादरों को हटाकर उनकी जगह नकली या नई चादरें लगाई गई थीं। SIT ने हाईकोर्ट को बताया है कि मामले की जांच अभी भी जारी है और पुराने गर्भगृह के दरवाजे से लिए गए नमूनों की तुलनात्मक जांच की जा रही है। ISRO-VSSC के अधिकारियों के मुताबिक, इस तुलनात्मक जांच के नतीजों को शामिल करते हुए एक विस्तृत अंतिम रिपोर्ट जल्द ही अदालत में जमा की जाएगी।

Banshika Sharma
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मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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