हमारा देश बहुत पुराना है, जमीन से कुछ न कुछ तो निकलेगा ही, धार्मिक स्थलों को लेकर लगातार हो रहे दावों को सचिन पायलट ने बताया ग़लत

सचिन पायलट ने संभल और अजमेर का जिक्र करते हुए सवाल किया आखिर ये कौन सी ताकतें हैं जो नफरत की राजनीति कर धीमी आंच में सियासी रोटियां सेकने में लगी हैं।
Sachin Pilot

Sachin Pilot statement on Ajmer Dargah and Sambhal : उत्तर प्रदेश के संभल की जामा मस्जिद के विवाद के बीच अब अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़ा मामला सामने आ गया है, हिंदू और मुस्लिम पक्ष के अपने अपने दावे हैं लेकिन इस पर जमकर सियासत हो रही है।कांग्रेस विधायक, राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का इस मामले में बड़ा बयान सामने आया है, उन्होंने दावों को गलत बताते हुए कहा कि हमारा देश बहुत पुराना, यहाँ खोदो या वहां खोदो जमीन से कुछ ना कुछ तो निकलेगा ही।

राजस्थान की टोंक विधानसभा से विधायक सचिन पायलट दो दिन पहले बुधवार को अपनी विधानसभा में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान मीडिया से बात कर रहे थे। सचिन पायलट ने कहा कि यहाँ युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा वे नौकरी की तलाश कर रहे हैं, किसान एमएसपी की गारंटी मांग रहा है और कुछ लोग जमीन के नीचे खोजबीन कर रहे हैं, अरे हमारा देश बहुत पुराना है, यहाँ खोदो या वहां खोदो, जमीन में से कुछ ना कुछ तो निकलेगा ही।

ये सरकार मंदिर मस्जिद के विवाद में उलझाकर ध्यान भटकाना चाहती है

सचिन पायलट ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ये सरकार रोजगार, किसान और महंगाई जैसे मुद्दों को हल करने की जगह मंदिर मस्जिद के विवाद में उलझाकर ध्यान भटकाना चाहती है। संभल और अजमेर का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल किया आखिर ये कौन सी ताकतें हैं जो नफरत की राजनीति कर धीमी आंच में सियासी रोटियां सेकने में लगी हैं।

बांटने वाले लोगों से सावधान रहने की अपील 

सचिन पायलट ने कहा, देश की संसद ने 1991 में एक कानून पारित किया था Places of Worship Act, जिसमें कहा गया कि 15 अगस्त 1947 से पहले के धार्मिक स्थलों का स्वरुप यथास्थिति में रहेगा उसके बाद भी हमें मंदिर मस्जिद के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है, हमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा और उनसे सावधान रहना होगा।

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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