मुख्य चुनाव आयुक्त पर सौरभ भारद्वाज का तीखा हमला, बोले- ‘सरकार का ढोल बजा रहे हैं’

मुख्य चुनाव आयुक्त पर सौरभ भारद्वाज का तीखा हमला, बोले- ‘सरकार का ढोल बजा रहे हैं’

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के इस दावे के बाद कि उनका नाम बिहार की मतदाता सूची से गायब कर दिया गया है, राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। इसी मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने चुनाव आयोग और खासतौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भारद्वाज ने कहा कि अब चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था नहीं रह गया, बल्कि भाजपा की एक इकाई की तरह काम कर रहा है।

‘चुनाव आयुक्त बनना रिटायर अफसरों के लिए इनाम’

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि कई बार सरकार अपने खास अफसरों को रिटायरमेंट के बाद इनाम के तौर पर चुनाव आयुक्त बना देती है। उन्होंने कहा, “कुछ बाबू रिटायर होते हैं और फिर उनकी लॉटरी लग जाती है — सरकारी बंगला, गाड़ी और रुतबा मिल जाता है। फिर वही लोग सरकार के पक्ष में हर मंच पर ढोल बजाने लगते हैं।” उन्होंने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता पर सवाल उठाया और कहा कि इस तरह की नियुक्तियों से चुनाव आयोग की साख पर बट्टा लगता है।

‘CEC को लगानी चाहिए टी.एन. शेषन की तस्वीर’

सौरभ भारद्वाज ने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक खास सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने कार्यालय में पूर्व चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन की तस्वीर लगानी चाहिए और उसे रोज देखना चाहिए। भारद्वाज के मुताबिक, ऐसा करने से शायद उनके विचारों में थोड़ी शुद्धता आ जाए। टी.एन. शेषन को भारत के इतिहास में एक कड़े और निष्पक्ष चुनाव आयुक्त के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने चुनाव आयोग को पूरी तरह से स्वतंत्र संस्था के रूप में स्थापित किया था।

चुनाव आयोग पर विपक्ष का बढ़ता अविश्वास

तेजस्वी यादव के आरोप और सौरभ भारद्वाज के बयान से यह साफ हो गया है कि विपक्ष अब चुनाव आयोग की भूमिका पर खुलकर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है और उसकी निष्पक्षता अब संदिग्ध हो गई है। तेजस्वी यादव का नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की घटना को विपक्ष ने गंभीर साजिश बताया है।

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