वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने रविवार को पार्टी के विदेश विभाग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। शर्मा ने यह कदम पार्टी के विदेश विभाग के पुनर्गठन और युवा नेताओं को अवसर देने के मकसद से उठाया है। उन्होंने लगभग एक दशक तक इस विभाग की जिम्मेदारी संभाली थी।
आनंद शर्मा ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर यह फैसला साझा किया। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि इस समिति के पुनर्गठन की जरूरत है, ताकि संभावनाशाली युवा नेताओं को आगे लाया जा सके। इससे विभाग के कामकाज में निरंतरता बनी रहेगी।”
कांग्रेस में अहम भूमिका
आनंद शर्मा कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य रहे हैं और पार्टी की ओर से अंतरराष्ट्रीय मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते, भारत-अफ्रीका साझेदारी और 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद भारत की स्थिति को वैश्विक स्तर पर रखने में अहम योगदान दिया था।
विदेश विभाग की उपलब्धियां
शर्मा ने अपने पत्र में कहा कि कांग्रेस का विदेश विभाग दशकों से दुनिया भर की समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ संबंध मजबूत करने में जुटा रहा है। उनके नेतृत्व में पार्टी ने एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका की प्रमुख पार्टियों के साथ मजबूत संबंध बनाए। इसके अलावा, उन्होंने 2007 में सत्याग्रह शताब्दी सम्मेलन और 2014 में जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने में भी अहम भूमिका निभाई थी।






