‘छात्रों’ के लिए ‘बड़ी खबर’! DUSU चुनाव में SFI-AISA ने जारी किया घोषणापत्र, इन मुद्दों को किया शामिल

‘छात्रों’ के लिए ‘बड़ी खबर’! DUSU चुनाव में SFI-AISA ने जारी किया घोषणापत्र, इन मुद्दों को किया शामिल

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव नज़दीक आते ही कैंपस का माहौल गरम हो गया है। इस बार SFI और AISA का गठबंधन चुनावी मैदान में छात्रों की असल जरूरतों और समस्याओं को लेकर उतरा है। राजधानी के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन संगठनों ने अपने उम्मीदवारों और घोषणापत्र को पेश किया। उनका दावा है कि पारंपरिक नारों से अलग वे छात्रों की रोजमर्रा की परेशानियों को हल करने पर ध्यान देंगे। चुनाव 18 सितंबर को होगा और अब छात्र राजनीति में नई बहस छेड़ दी गई है।

चार पदों पर उम्मीदवार, छात्र-हित केंद्र में

SFI-AISA गठबंधन ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। अंजली अध्यक्ष पद से, सोहन उपाध्यक्ष पद से, अभिनंदना सचिव पद से और अभिषेक संयुक्त सचिव पद से चुनाव लड़ रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उनका घोषणापत्र पूरी तरह छात्र-केंद्रित है और छात्रों की वास्तविक समस्याओं को हल करने की कोशिश करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य छात्र संगठनों की तुलना में उनका एजेंडा ज्यादा प्रभावशाली और व्यावहारिक है। छात्रों के हित में काम करने का संकल्प लेकर वे चुनाव में मजबूती से उतर रहे हैं।

छात्रों की असली समस्याओं पर फोकस

SFI-AISA ने बताया कि वे ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं जो छात्रों के जीवन से सीधे जुड़े हैं। कंसेशनल मेट्रो पास अभियान, CUET एडमिशन में मदद, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सबको हॉस्टल की सुविधा और “बोगस” कोर्स जैसे SEC-VAC को समाप्त करने की मांग उनके घोषणापत्र में शामिल है। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं छात्रों को आर्थिक बोझ से राहत देंगी और उनकी पढ़ाई का माहौल बेहतर करेंगी। गठबंधन का मानना है कि इन मुद्दों को लेकर वे छात्रों के बीच विश्वास और समर्थन हासिल कर सकते हैं।

पैसा और मसल पावर के खिलाफ ईमानदार राजनीति का आह्वान

SFI-AISA ने NSUI और ABVP जैसे बड़े संगठनों पर चुनाव में पैसा और मसल पावर के इस्तेमाल का आरोप लगाया। साथ ही, छात्रों से अपील की कि वे उन उम्मीदवारों को वोट दें जो ईमानदारी से उनकी समस्याओं के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति का असली उद्देश्य छात्रों के हित में काम करना है, न कि ताकत और पैसे के बल पर चुनाव जीतना। उनका संदेश है कि छात्र बदलाव चाहते हैं और उन्हें ऐसे नेताओं का समर्थन करना चाहिए जो सच में शिक्षा और छात्र कल्याण के लिए काम करें।

लेखक के बारे में
Follow Us :GoogleNews