पश्चिम बंगाल में उद्योगों की स्थिति को लेकर बुधवार को भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच तीखी बहस छिड़ गई। टीएमसी नेताओं ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासनकाल में बंगाल में उद्योग दोगुने हो गए हैं, जबकि बीजेपी ने इसके उलट स्थिति होने का आरोप लगाया। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर आंकड़ों के साथ तीखे हमले किए।
बंगाल की उद्योग मंत्री शशि पांजा ने बीजेपी पर राज्य की औद्योगिक प्रगति को बदनाम करने के लिए झूठे अभियान चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “2011 में बंगाल में पंजीकृत कार्यालयों वाली कंपनियों की संख्या 1,37,156 थी, जो 2025 में बढ़कर 2,50,343 हो गई। पिछले छह वर्षों में 44,040 कंपनियों ने बंगाल में पंजीकरण कराया, जबकि केवल 1742 कंपनियों ने अपने पंजीकृत कार्यालय राज्य से बाहर स्थानांतरित किए।” पांजा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में बंगाल में विकास की लहर का दावा किया और बीजेपी पर झूठ और आधे-अधूरे सच फैलाने का आरोप लगाया।
अमित मालवीय का पलटवार
बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने पलटवार करते हुए कहा कि कार्यालय पंजीकरण करना और एक समृद्ध उद्योग चलाना एक समान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल की असली कहानी बंद पड़ी फैक्ट्रियों, भागती कंपनियों, निवेशकों के घटते विश्वास और ममता बनर्जी के शासन में राज्य के औद्योगिक गौरव से आर्थिक चेतावनी की कहानी बनने में निहित है। बीजेपी ने कहा कि अप्रैल 2011 से मार्च 2025 तक 6688 कंपनियों ने अपने पंजीकृत कार्यालय बंगाल से बाहर स्थानांतरित किए, जिनमें 110 सूचीबद्ध कंपनियां शामिल हैं। मालवीय ने इसे कागजी गड़बड़ी नहीं, बल्कि सामूहिक पलायन करार दिया।
औद्योगिक विकास पर दावे
यह विवाद पश्चिम बंगाल की आर्थिक स्थिति और औद्योगिक विकास पर दोनों दलों के परस्पर विरोधी दावों को उजागर करता है। जहां टीएमसी ने आंकड़ों के साथ अपने शासन में प्रगति का दावा किया, वहीं बीजेपी ने इसे खोखला बताते हुए राज्य की आर्थिक बदहाली का आरोप लगाया। यह बहस बंगाल की राजनीति में उद्योग और विकास के मुद्दे पर गहरे मतभेदों को दर्शाती है।





