कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण खबर, विभाग ने 3 दिन के अंदर मांगी ये जानकारी , जानें क्या है सरकार का प्लान?

खबर है कि सीएस समीक्षा के दौरान विभागों से उनके यहां रिक्त पद और पदों को भरने के संबंध में जानकारी लेकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर सकते है।
employees news

government employee news

Bihar Employees News: बिहार के संविदा कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। भवन निर्माण विभाग ने 2005 से अब तक संविदा और बाहरी स्रोतों से की गई सभी नियुक्तियों का पूरा विवरण मांगा है। इस पूरी कवायद को आगामी वर्ष में होने वाले विधानसभा चुनाव 2025 से जोड़कर देखा जा रहा है।

खबर है कि अगले वर्ष होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार की विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने की तैयारी है। भवन विभाग ने 2005 से अब तक संविदा और बाहरी स्रोतों से नियोजित कर्मियों से संबंधित आंकड़े विभाग को हर हाल में तीन दिनों के अंदर मुहैया कराने के निर्देश दिए है।आदेश के बाद अब अलग-अलग विभाग अपने यहां रिक्त पदों का आकलन करने में जुट गए हैं।

चुनाव से पहले रिक्त पदों को भर सकती है नीतिश सरकार

भवन निर्माण विभाग ने सभी अधीक्षण अभियंताओं को पत्र लिखकर 3 दिन के अंदर यह जानकारी ईमेल के जरिए और 13 नवंबर तक फिजिकल कॉपी जमा कराने का आदेश दिया है। विभाग ने जानकारी देने के लिए एक खास फॉर्मेट भी जारी किया है, जिसमें अनारक्षित, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग और पिछड़ा वर्ग, सभी श्रेणियों में की गई नियुक्तियों की साल-दर-साल जानकारी देनी होगी।सभावना है कि चुनाव से पहले राज्य सरकार युवाओं को साधने के लिए अधिक से अधिक रिक्त पदों पर नियुक्तियां कर सकती है।

मुख्य सचिव हर सोमवार को करेंगे योजनाओं की समीक्षा

इधर, विकास कार्यों को गति देने के लिए राज्य के मुख्य सचिव नियमित रूप से विभागों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे हैं और अधिकारियों के साथ पहली बैठक में ही प्रत्येक सोमवार को योजनाओं की समीक्षा का निर्णय लिया है। खबर है कि सीएस समीक्षा के दौरान विभागों से उनके यहां रिक्त पद और पदों को भरने के संबंध में जानकारी लेकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर सकते है।

Pooja Khodani
लेखक के बारे में
Pooja Khodani

12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
Follow Us :GoogleNews