केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा है कि भारत में धर्मनिरपेक्षता और साम्यवाद तभी तक जीवित रह सकता है, जब तक हिंदू बहुमत में रहेंगे। उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मजूमदार ने कहा कि हिंदू समुदाय ही समावेशिता में विश्वास रखता है, जिसके कारण ये विचारधाराएं भारत में टिक सकती हैं।
मजूमदार ने पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) से आए दलित शरणार्थियों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल का उदाहरण दिया, जिन्हें अपनी गरिमा बचाने के लिए अपनी पत्नी और बेटी के साथ भारत भागना पड़ा। मजूमदार ने बताया कि मंडल के कहने पर पूर्वी पाकिस्तान में रुके दलित समुदाय को भारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जिसके कारण कई पीढ़ियों को भारत में शरण लेनी पड़ी।
बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यक
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से दलितों, पर अत्याचार जारी है। सीएए के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने की समय सीमा को 2024 तक बढ़ा दिया गया है। मजूमदार ने इसे उन समुदायों के प्रति नैतिक जिम्मेदारी बताया, जिन्हें विभाजन के बाद से भुला दिया गया था।
विदेशी अधिनियम में बदलाव
केंद्र सरकार ने हाल ही में विदेशी अधिनियम में बदलाव करते हुए एक नया अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत दुनिया भर में उत्पीड़न का सामना कर रहे हिंदुओं को भारत में शरण मिल सकती है। सीएए के तहत, 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को बिना पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेजों के भारत में रहने की अनुमति होगी। यह कदम विशेष रूप से 2014 के बाद भारत आए पाकिस्तान के हिंदुओं के लिए राहतकारी होगा।
