
Supreme Court, Ram Mandir, Ram Mandir Donation Case, Ram Mandir Donation Irregularities, Ram Temple Donation, CJI Surya Kant, SIT Investigation, SIT Probe, Ram Mandir Trust, Donation Case, Supreme Court Hearing, Forensic Auditor, Tushar Mehta, Uttar Pradesh SIT, Ayodhya Ram Mandir, Ram Mandir News, Supreme Court News, India News
सुप्रीम कोर्ट में मां-बेटे के संपत्ति विवाद की सुनवाई के दौरान अदालत में उस वक्त माहौल कुछ अलग हो गया, जब न्यायिक बहस के बीच मां-बेटे के रिश्ते की बात सामने आई। कोर्ट ने बेटे को सलाह दी कि वह अपनी मां के पास जाए, उनके पैर छूकर माफी मांगे और उनका आशीर्वाद ले। न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने सुनवाई के दौरान यह मौखिक टिप्पणी की।
जस्टिस शर्मा ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आपको अपनी मां के पैर छूकर माफी मांगनी चाहिए। अपने सभी पापों के लिए माफी मांगिए।” अदालत में मौजूद वकील को संबोधित करते हुए उन्होंने पूछा, “क्या बेटे का ऐसा करना गलत नहीं है? हम बेटे से कह रहे हैं कि वापस मां के पास जाए, उनके पैर छूए, उन्हें महसूस करे, माफी मांगे और उनका आशीर्वाद ले।”
क्या है विवाद
मामला दिल्ली की एक संपत्ति से जुड़ा है, जिसके एकमात्र मालिक माता-पिता हैं। प्रेम और स्नेह के कारण उन्होंने बेटे और उसकी पत्नी को पहली मंजिल पर बिना किराए के लाइसेंसी के रूप में रहने की अनुमति दी थी। लेकिन कुछ समय बाद स्थितियां बिगड़ गई। माता-पिता का आरोप है कि बेटा और बहू उन्हें परेशान करने लगे और संपत्ति अपने नाम ट्रांसफर कराने का दबाव बनाने लगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बेटे ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा कर दिया। इसके बाद माता-पिता ने अखबार में सार्वजनिक नोटिस छपवाकर बेटे से रिश्ता तोड़ने की घोषणा की, FIR दर्ज कराई और संपत्ति खाली करने को कहा। उन्होंने कब्जा वापस लेने, स्थायी निषेधाज्ञा और हर्जाने की मांग करते हुए मुकदमा भी दायर किया।
निचली अदालतों का फैसला
ट्रायल कोर्ट ने साफ माना कि माता-पिता ही संपत्ति के एकमात्र मालिक हैं और बेटा तथा उसकी पत्नी सिर्फ लाइसेंसी हैं। लाइसेंस खत्म होने के बाद उन्हें पहली मंजिल खाली करनी होगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को इस फैसले को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट की अनूठी सलाह
माता-पिता के पक्ष में निचली अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद बेटे ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने विशेष अनुमति याचिका के जरिए हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान मामला उस समय खास हो गया जब न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने कानूनी विवाद से अलग बेटे को अपनी मां से रिश्ते सुधारने की सलाह दी। उन्होंने बेटे से कहा कि वह अपनी मां के पास जाए, उनके पैर छूकर माफी मांगे और उनका आशीर्वाद ले। उन्होंने बेटे को कानूनी लड़ाई से आगे बढ़कर मां के साथ अपने रिश्ते पर विचार करने की सलाह दी और उनसे माफी मांगकर आशीर्वाद लेने को कहा।
पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

