Hindi News

पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, झारखंड और ओडिशा से भी बुलाए जाएंगे न्यायिक अधिकारी

Written by:Gaurav Sharma
Published:
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन में 80 लाख दावों और आपत्तियों के अंबार को देखते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की अनुमति दे दी ताकि प्रक्रिया को समय पर पूरा किया जा सके।
पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, झारखंड और ओडिशा से भी बुलाए जाएंगे न्यायिक अधिकारी

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रही खींचतान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बड़ा और असाधारण आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने 80 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों के निपटारे में हो रही देरी को देखते हुए न्यायिक अधिकारियों के पूल का दायरा बढ़ा दिया है। कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सिविल जजों की तैनाती के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से भी न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की इजाजत दे दी है।

यह फैसला चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने दिया। कोर्ट ने यह कदम तब उठाया जब कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने एक पत्र के जरिए बताया कि 294 सेवारत और सेवानिवृत्त न्यायिक जजों की तैनाती के बावजूद लगभग 80 लाख मामलों की जांच में कम से कम 80 दिन का समय लगेगा।

अनुच्छेद 142 के तहत मिला विशेष अधिकार

मामले की गंभीरता और समय की कमी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया। बेंच ने कहा कि इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करना जरूरी है, इसलिए न्यायिक अधिकारियों का दायरा बढ़ाना आवश्यक है। कोर्ट ने कम से-कम 3 साल के अनुभव वाले न्यायिक अधिकारियों को इस काम में नियुक्त करने की अनुमति दी है।

शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा कि वे झारखंड और ओडिशा में अपने समकक्षों से अनुरोध करें और इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए समान रैंक के न्यायिक अधिकारियों को पश्चिम बंगाल में तैनात करने में मदद लें।

चुनाव आयोग उठाएगा खर्च

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि झारखंड और ओडिशा से आने वाले न्यायिक अधिकारियों की तैनाती पर होने वाला सारा खर्च भारत का चुनाव आयोग (EC) वहन करेगा। इसके साथ ही, कोर्ट ने चुनाव आयोग को 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची (Final Electoral Roll) प्रकाशित करने की भी अनुमति दे दी है।

अदालत ने यह भी साफ किया कि सत्यापन की प्रक्रिया जारी रहने पर चुनाव आयोग पूरक सूची (Supplementary List) जारी कर सकता है। इसका मतलब है कि जिन मतदाताओं का सत्यापन 28 फरवरी के बाद पूरा होगा, उन्हें पूरक सूची के जरिए शामिल किया जाएगा ताकि कोई भी योग्य मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला मतदाता सूची 2002 से जुड़े तार्किक अंतरों (Logical Errors) से संबंधित है, जिसमें माता-पिता के नाम में अंतर और मतदाता व उनके माता-पिता के बीच उम्र का फासला 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा होना शामिल है। इससे पहले 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच “दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप” और “विश्वास की कमी” पर चिंता जताई थी। तब कोर्ट ने प्रक्रिया में मदद के लिए मौजूदा और पूर्व जिला जजों को तैनात करने का निर्देश दिया था।

मध्य प्रदेश से जुड़ी विश्वसनीय और ताज़ा खबरें MP Breaking News in Hindi यहां आपको मिलती है MP News के साथ साथ लगातार अपडेट, राजनीति, अपराध, मौसम और स्थानीय घटनाओं की सटीक जानकारी। भरोसेमंद खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें और अपडेटेड रहें !
Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
Follow Us :GoogleNews