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पीएम मोदी और RSS पर आपत्तिजनक कार्टून, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को राहत तो दी मगर…

Written by:Mini Pandey
Published:
हेमंत मालवीय की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने 14 जुलाई को कोर्ट में दलील दी कि यह मामला 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान बनाए गए एक कार्टून से संबंधित है।
पीएम मोदी और RSS पर आपत्तिजनक कार्टून, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को राहत तो दी मगर…

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक कार्टूनिस्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं पर आपत्तिजनक कार्टून सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई से राहत प्रदान किया। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को अंतरिम राहत देते हुए चेतावनी दी कि यदि उन्होंने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट साझा करना जारी रखा तो राज्य उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

मालवीय ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 3 जुलाई के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार किया गया था। इंदौर के लसूड़िया पुलिस स्टेशन में आरएसएस कार्यकर्ता और वकील विनय जोशी की शिकायत पर मई में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जोशी ने आरोप लगाया कि मालवीय ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री अपलोड की।

कानूनी रूप से अपराध नहीं

हेमंत मालवीय की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने 14 जुलाई को कोर्ट में दलील दी कि यह मामला 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान बनाए गए एक कार्टून से संबंधित है। उन्होंने कहा कि यह कार्टून भले ही कुछ लोगों को अप्रिय लगे लेकिन यह कानूनी रूप से अपराध नहीं है। ग्रोवर ने कथित आपत्तिजनक पोस्ट को हटाने की सहमति जताई। हालांकि, जस्टिस धूलिया ने टिप्पणी की कि इस मामले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग हो रहा है।

घटनाएं बार-बार हो रहीं

मध्य प्रदेश की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं। पुलिस ने मालवीय के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 299, 352 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67-ए के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द बिगाड़ने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और शांति भंग करने की मंशा से अपमान करने जैसे आरोप शामिल हैं।